महिला ने पूछा-शौहर नामर्द है मुझे क्या करना चाहिए?,सवाल पर मौलाना ने दिया ज़बरदस्त ज़वाब

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इस्लाम में निकाह को सुन्नत बताया गया है.इस्लाम ने हर मुस्लिम के लिए निकाह और उसके बाद अपने जीवन साथी के साथ कैसे रहे इसके लिए नियम बनाये है.लेकिन अगर रिश्ते निभाने में दुश्वारी आ रही है फिर इसका भी इस्लाम में हल है.दोस्तों में हम आज एक ऐसे मसले पर इस्लाम का नजरिया बताने जा रहे है अगर शौहर नामर्द है फिर बीबी को क्या करना चाहिए.

दोस्तों इस मसले पर एक मोहतरमा ने मौलाना तारिक मसूद से सवाल किया.इस पर मौलाना ने कहाकि निकाह का असल मक़सद है नस्ल बढ़ाना,इस दुनिया में निकाह को इसी लिए रखा गया है ताकि दुनिया में लोगों की नस्ल बढ़ती रहे.आज दुनिया में यह सोच कर निकाह नहीं किया जाता है,बल्कि निकाह के वक़्त यही कहा जाता है कि माँ की खिदमत करने के लिए शौहर की खिदमत करने के लिए और तरह तरह की बातें की जाती हैं लेकिन इस्लाम ने जो बताया है,वह यही है कि निकाह का मक़सद नस्ल को आगे बढ़ाना है।

चूंकि बच्चे एक मर्द और औरत से ही पैदा हो सकते हैं,और अगर बिना निकाह के यह बच्चे पैदा करें, तो समाज उन्हें बुरी नज़र से देखेगा,इसी लिए निकाह का मामला रखा गया है ताकि जायज तरीके से मर्द और औरत बच्चे पैदा करें और उनकी नस्ल आगे बढ़े।इसी लिए इस्लाम में कहा गया है कि ऐसे औरतों से शादी करो जो ज़्यादा बच्चे पैदा करती हूँ.

इस बारे में लोग कहते हैं कि कैसे यह बात पता करें कि औरत ज़्यादा बच्चे पैदा करेगी या कम बच्चे पैदा करेगी तो इसका यह तरीका बताया गया है कि जब तुम किसी लड़की से निकाह करना चाहो तो उसके घर वालों को देखो,उसकी माँ बहन,खाला और दूसरे लोगों को देखो,उस से मालूम हो जाएगा कि यह औरत कैसी है।

वहीं कई मर्तबा ऐसा भी होता है कि औरत बांझ होती है,शादी के कई कई साल तक किसी किसी औरत के बच्चे नहीं पैदा होते हैं,और दवा इलाज के बाद भी जब बच्चे नहीं पैदा होते हैं तो उसे बांझ कह दिया जाता है,अब इस तरह की औरत के शौहर के लिए चाहिए कि वह नस्ल आगे बढ़ाने के लिए दूसरी लड़की से निकाह कर ले।

वहीं कभी कभी ऐसा भी होता है कि मर्द बांझ होते हैं,और मर्दाना कमजोरी ऐसी होती है कि बच्चे पैदा करने की ताक़त नहीं रखते हैं,अब ऐसे मर्दों की बीवी क्या करे। तो मौलाना तारिक मसूद साहब अपने एक विडियो में बयान करते हैं कि ऐसी औरत के लिए मुस्तहब है कि वह अपने शौहर से तलाक लेकर दूसरा निकाह कर ले।उन्होंने कहाकि इस्लाम इसकी इजादत देता है.

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