हिन्दी और उर्दू भाषा के लिए आगे बढ़ कर काम कर रहा है ‘साहित्य दुनिया’

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Sahitya Duniya

हिंदी और उर्दू साहित्य का संगम है साहित्य दुनिया। इसके ज़रिए हिंदी और उर्दू साहित्य को मिलाकर आगे बढ़ाने की कोशिशें की जा रही हैं। आज के वक़्त में भाषा की ओर लोगों की रुचि कम होती जा रही है जिससे न सिर्फ़ उच्चारण और तलफ़्फ़ुज़ में बल्कि लिखने और पढ़ने में भी तरह-तरह के व्याकरण दोष आने लगे हैं। जहाँ सोशल मीडिया का उपयोग बढ़ा है और इसकी ख़ामियाँ अक्सर गिनायी जाती हैं, वहीं सोशल मीडिया के ज़रिए ही लोगों को भाषा से जोड़ने का काम साहित्य दुनिया कर रही है। आसान शब्दों में, सरल तरीक़े से तरह-तरह की भाषा और व्याकरण सम्बंधी बातें लोगों तक पहुँचायी जाती है। साहित्य दुनिया की कुछ लोकप्रिय पोस्टर शृंखलाएँ हैं फ़र्क़ नुक़्ते का, मात्राओं के भेद, एक शेर रोज़ाना, चंद पंक्तियाँ रोज़ाना आदि। यही नहीं साहित्य दुनिया की वेबसाइट भी हिंदी और उर्दू साहित्य से जुड़ी तमाम बातों को किताबी भाषा में नहीं बल्कि आम बोलचाल की भाषा में लोगों तक पहुँचाने का काम कर रही है। जहाँ शाइरी की बातें, व्याकरण की बातें, एक शाइर सौ शेर, दो शाइर दो ग़ज़लें, घनी कहानी छोटी शाखा जैसी कई शृंखलाएँ मौजूद हैं।

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साहित्य दुनिया अपनी तरह का एक अलग विचार है, जहाँ किसी एक भाषा को नहीं बल्कि हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं की समझ और बढ़ोत्तरी के लिए काम किया जा रहा है। इस नए विचार के पीछे कोशिश है दो युवा सोच की, ये हैं लखनऊ के अरग़वान रब्बही और मुंबई की नेहा शर्मा। सोशल मीडिया में हुई आपसी बातों के ज़रिए उर्दू और हिंदी भाषा के लगाव और उसके विस्तार के लिए कुछ करने की सोच ने साहित्य दुनिया शुरू करने का हौसला दिया। फ़ेसबुक पेज से शुरू हुई इस अभियान ने विस्तार करते हुए इन्स्टाग्राम, ट्विटर और वेबसाइट में अपना रुतबा क़ायम किया। अरग़वान और नेहा बताते हैं कि उन्हें शुरुआत में ये नहीं पता था कि साहित्य दुनिया को कितने लोग चाहेंगे लेकिन मन में एक ख़याल था कि अगर कोई न भी पसंद करे और न भी सीख पाए तो कम से कम वो दोनों कुछ न कुछ ज़रूर सीखेंगे। उनका कहना है कि साहित्य दुनिया के ज़रिए उन्होंने बहुत कुछ सीखा है और ये प्रक्रिया जारी है। जब-जब लोग उनसे भाषा से जुड़ा कोई सवाल करते हैं तो वो उससे कुछ न कुछ सीखते हैं। वहीं दोनों का ये कहना है कि उर्दू और हिंदी बहनों की तरह हैं दोनों साथ रहेंगी तो भाषा का विस्तार ही होगा।

साहित्य दुनिया केवल सोशल मीडिया या वेबसाइट तक ही सीमित नहीं है बल्कि अपने तरह-तरह के कार्यक्रमों के ज़रिए लोगों के बीच अपनी हाज़िरी दर्ज करता रहा है। वॉइस अकादमी, लायब्रेरी, थिएटर ग्रूप्स में तरह- तरह के वर्कशॉप, परिचर्चा आदि के ज़रिए हिंदी और उर्दू भाषा के विस्तार के लिए काम करता रहा है। साहित्य दुनिया के साथ अरग़वान और नेहा अब अलग-अलग स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी में जाकर भाषा की नींव मज़बूत करने की कोशिश करना चाहते हैं और उनका कहना है कि उन्हें इस काम में स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी के शिक्षकों का सहयोग मिल रहा है। इस अप्रैल में एक साल पूरा होने की ख़ुशी में साहित्य दुनिया का एक आयोजन मुंबई में होने वाला है जिसमें कई साहित्यकारों, शाइरों, कवियों, भाषा में रुचि रखने वाले लोगों और विद्यार्थियों के शामिल होने की आशा है।

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