5 ऐसे शख्स जिन पर रोज़ा नही है फर्ज़,प्यारे नबी(स.अ.व.) ने फ़रमाया….

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रमजान का महिना इस्लाम धर्म में सबसे आला माना जाता है इसकी कई वज़ह है आसमानी पवित्र किताबे इसी महीने दुनिया में नाजिल हुई.इसके अलावा भी रमजान की बड़ी फ़ज़ीलत है.रमजान महीने को मुस्लिम इबादत का महीना मानते है,मुस्लिम इस महीने में रोज़े रखते है,और अपना अधिक से अधिक समय इबादत में लगाते है.

रमजान में सूरज निकलने से पहले सहरी में ही रोज़ेदार खा सकता है उसके बाद वो सूरज ढलने पर ही रोज़ा तोड़ता है.इस्लामिक मान्यता के अनुसार,रमजान के महीने में इबादत करने पर अल्लाह सारे गुनाह माफ़ कर देता है.रमजान में खाने पीने के अलावा रोजेदार को आंख और कान का भी रोज़ा रखना होता है यानी वो ना तो किसी कि बुराई करेगा और ना ही किसी के बारे में बुरा देखेगा.

वैसे तो रोज़े हर बालिग पर फर्ज़ है.इस्लाम में हर बालिग पर रोज़े रखने का सख्ती से हुक्म है.लेकिन रोज़े रखने से अल्लाह ने पांच शख्स को छूट दी है.इन लोगो को रोज़े रखने की छूट है.दोस्तों नबी (स.अ.व.) ने फ़रमाया है कि अगर कोई शख्स बीमार है तो उस पर रोज़ा फर्ज़ नही है.इसके अलावा अगर कोई शख्स सफर में है और सफर में एक दिन का समय लगता है तो उस शख्स पर रोज़ा फर्ज़ नही है.

इसके अलावा ऐसी महिला जोकि गर्भवती है उस पर भी रोज़ा फर्ज़ नही है.दरअसल गर्भवती महिला नार्मल अवस्था के मुकाबला कमज़ोर होती है इसलिए इस्लाम में शुरू से ही ऐसी महिलाओ को रोज़े रखने से छूट दी गयी है.इसके अलावा ऐसी औरतो को भी इस्लाम ने रोज़े ना रखने की इजाजत दी है जो अपने बच्चे को दूंध पिला रही है.

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