नज़र किसको लगती है और नज़र कैसे उतारे?…मौलाना तारिक ने बयान में बताया तरीका

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नज़र जादू से ज़्यादा ख़तरनाक है,जादू और नज़र की अक्सर अलामात मिलती जुलती हैं हाँ कुछ अलामात से पहचाना जा सकता है कि ये जादू नहीं नज़र है।नज़र या तो किसी के हसद की वजह से लगती है या फिर किसी पर बहुत ज़्यादा प्यार आने की वजह से भी नज़र लग जाती है,नज़र माँ बाप की भी लग जाती है यानी वालदैन भी अगर बच्चों को प्यार से देखें तो बच्चे उनकी नज़र के भी शिकार हो जाते हैं।

जिन लोगों की नज़र लगती है उनकी तबीयत ख़राब होती है ग़ुस्सा चिड़चिड़ापन अजीब से बेचैनी महसूस होती है या फिर इन्सान किसी को देखता है,ख्वाब में जो सिर्फ टिकटिकी बांध कर उसे देख रहा होता है कहता करता कुछ नहीं है।हम यहाँ पर नज़र लगने की कुछ अलामत आप को बता रहे हैं।दर्द का आँखों और कनपटियों से शुरू हो कर सर की जानिब फैलना और फिर कंधों से उतरते हुए हाथ पावं के किनारों में फैल जाना।

जिस्म पर उमूमन चेहरे कमर और रानों में सुर्ख़ नीले दानों का बकसरत निकलना या धब्बे बनना।बकसरत पेशाब का आना और क़ज़ा-ए-हाजत के लिए जाना।बहुत ज़्यादा पसीना आना ख़सूसन माथे और कमर में,दिल की धड़कन का कम या ज़्यादा होना दिल डूबता महसूस होना और मौत का ख़ौफ़।चेहरे का ज़रदी माइल हो जाना।

तिलावत नमाज़ और दम के दरमयान बकसरत जमाइयाँ आना और ऑंसूं का बहना,पढ़ाई और काम से दिल का उचाट हो जाना हाफ़िज़े का कमज़ोर होना,मुसलसल थूक बहना झाग की मानिंद या सफ़ैद बलग़म।किसी को टिकटिकी बांध कर अपनी तरफ़ देखना,जिस्म में ख़ारिश और च्यूंटीयां रेंगती महसूस करना,आँखों का शिद्दत से फड़फड़ाना झपकना,हाथ और पावं के किनारों में सोईयां चुभना और ठंडा रहना

मौलाना तारिक मसूद

जिस्म का बहुत ज़्यादा गर्म रहना,इन्सान का अपने आपसे लापरवाह हो जाना ख़सूसन औरतों का अपनी आराइश-ओ-ज़ेबाइश से बे नयाज़ हो जाना,बच्चों का माँ का दूध ना पीना बहुत ज़्यादा रोना।पलकों और भँवों पर बोझ,आँखों में अजीब सी तेज़ चमक,जोड़ों में बोझ महसूस करना।नज़र लगना हक़ है और अहादीस मुबारका से ये बात साबित है।

जिस शख़्स की नज़र लगी हो उसे किसी बर्तन में वुज़ू या ग़ुसल कराया जाये और वुज़ू या ग़ुसल का पानी उस शख़्स पर डाला जाये जिसे नज़र लगी हो इस से इंशाअल्लाह नज़र का असर खतम हो जायेगा।दूसरा ईलाज ये कि दुआएं या आयात पढ़ कर इस पर दम किया जाये एक दुआ ये कि: بِسْمِ اللَّهِ أَرْقِيكَ مِنْ كُلِّ شَيْءٍ يُؤْذِيكَ، وَمِنْ شَرِّ كُلِّ نَفْسٍ أَوْ عَيْنِ حَاسِدٍ اللَّهُ يَشْفِيكَ بِسْمِ اللَّهِ أَرْقِيكَ

और सबसे बेहतर ईलाज ये है कि मऊज़तेन (सूरत नास और सूरत अलफ़लक़)पढ़ कर नज़र लगने वाले पर दम किया जाये इस से इनशा अल्लाह ऐसा करने से नज़र का असर खत्म हो जाएगा,इसी तरह अगर देखने वाला किसी अच्छी चीज़ को देखकर माशा अल्लाह कहे तो ऐसा करने से नज़र का असर नहीं होगा।

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