‘मीडिया आपको तवज्जो नहीं दे तो मीडिया को ही बदल दें’,भीम आर्मी के मुखिया ने लांच की न्यूज़ एप

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भारत में मीडिया कैंसर से ग्रस्त है।जो तथाकथितमुख्यधारा का मीडिया है,उसे पेड न्यूज़,राजनीतिक एजेंडों और झूठ बोलने से ही फुरसत नहीं।आजकल इसका शिकार मैं भी हूँ।जो नहीं कहा-वह बुलवाना इसब्राह्मणवादी,शहरी,सवर्ण,बेईमान मीडिया का काम है।अच्छा भी है।

ये जितनी अपनी साख खोएंगे,जनता उतनाही वैकल्पिक मीडिया को अपना मीडिया समझकर उसे अपना लेगी,यह विकल्प ही मूल है और जो मूल है,वही सत्य है.यह बात आज भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखरआज़ाद ने नेशनल स्पीक एप्लीकेशन के लॉन्च के दौरानकही,एप्लीकेशन के सम्पादक वसीम अकरम त्यागी ने इस दौरान उनका स्वागत किया।उन्होंने कहाकि हमारा टेलीविज़न,अख़बार और परम्परागत मीडिया सत्ता के साथ खड़ा है।समाज ख़ाली है।

यह गिरावट का ऐसा दौर है कि मीडियाने अपना रवैया सत्ता से जोड़ लिया हैमीडिया को औरआसानी हो जाती है जब उसे बहुजन के ख़िलाफ़ अपनाएजेंडाचलाने के लिए मानसिक खाद और पैसा दोनोंमिलते हैं।

उन्होंने कहाकि आप याद कीजिए तो आपकोपता चल जाएगा कि मीडिया बहुजन के ख़िलाफ़ क्यों हैसाल 2014 से पहले इस मीडिया को ख़बर प्रसारण केलिए मैनेज किया जाता था लेकिन वर्ष 2014 के बाद सेख़बर छिपाने की मीडिया ने नीति बना ली।

उन्होंने कहाकि मीडिया आगरा की संजली के क़त्ल,भारत बंद के दौरानबहुजनों पर अत्याचार,13 पोइंट रोस्टर केलागू होने से बहुजन मूलनिवासियों को उच्च शिक्षा सेवंचित करने की ख़बरें नहीं दिखाता है और ना ही उसे प्रसारित करता है

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यधारा केकथित मीडिया ने ‘भारत को चलाने’ के बयान को ‘भारतको जलाने’ के रूप में झूठ बोलायह झूठ वह रात दिनपरोसता है,

उन्होंने मीडिया के भक्ति काल की चर्चा करतेहुए कहाकि नोटों में चिप ढूंढने वाले मीडिया से आपसरोकार की पत्रकारिता की कामना नहीं कर सकते,आज़ाद ने कहाकि देश के मूलनिवासी, बहुजन, ट्राइबल,मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यकों की ख़बरों कोनज़रअंदाज़ किया जा रहा है।

उन्होंने फ़िलस्तीन और वेनेज़ुएला का उदाहरण देते हुएकहाकि इन देशों में भी मूलनिवासियों पर ज़ुल्म हो रहा हैऔर दुनिया का ज़ायोनिस्ट मीडिया उनकी प्रताड़ना परखामोश हैउन्होंने कहाकि फिलस्तीन में अपने ही देश सेनिकाले गए मज़लूम फ़िलस्तीनियों की ख़बरों परसीएनएन, बीबीसी ख़ामोश रहता है और ज़ायोनिस्टताकतों के दबाव में इज़राइल के क़ब्ज़े को जायज़ बता देता है।

अपने ही देश में अपने घर की माँग कर रहे गाजाऔर पूर्वी बैंक के करोड़ों फ़िलस्तीनियों के सवाल को यहीमीडिया ग़ायब करता हैगाजा में अपने घर के लिए रास्तामांग रहे हज़ारों फिलस्तीनियों पर ज़ालिम ज़ायोनिस्टइज़राइल के जुल्म की दास्तान का भी ज़िक्र नहीं होता औरअगर एक फ़िलस्तीनी लड़का किसी इज़राइली से अपनेदेश को आज़ाद करने की माँग कर ले तो घटिया मीडियाउसे आतंकवादी लिखता है।

दक्षिण अमेरिका के हालिया घटनाक्रम और मीडिया केरवैये पर चन्द्रशेखर ने कहाकि कमोबेश ऐसा ही वेनेज़ुएलाके साथ हो रहा है,एक देश में निकोलस मदुरो की चुनी हुईसरकार पर दूसरे राष्ट्रपति को बिठाकर वेनेज़ुएला के बारे मेंझूठ बोला जा रहा है। कौन है मदुरो।

वेनेज़ुएला का मूलनिवासी जो अपने देश के तेल को अमेरिका और गोरों केसाथ बांटना नहीं चाहते,वेनेज़ुएला में उनके ही देश में रहरहे गोरे स्पैनी लोगों ने साँठ गाँठ कर बर्बादी फैलाने में कोईकसर नहीं रखी.

ख़ुद वेनेज़ुएला के मूलनिवासी अपनेमूलनिवासी राष्ट्रपति निकोलन मदुरो के साथ हैं लेकिन पूरीदुनिया को वेनेज़ुएला से उन्हें हटाना है ताकि तेल,संसाधनपर क़ब्जा करके वेनेज़ुएला को लूटा जा सक.

मैं आप से कहना यह चाह रहा हूं कि भारत हो या फिलस्तीन,वेनेज़ुएला हो या ग्वाटेमाला, क्यूबा हो या निकारगुआ। हर देश में मूलनिवासी की आवाज़ को दबाने के लिएराजनीति,कॉर्पोरेट और मीडिया ने एक झूठ और लूट काखेल रचा है।

अगर हम इसे नहीं समझेंगे तो हम और गर्त मेंचले जाएंगे। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से अपील की कि यह मीडिया आपको ग्राहक समझता है और आपके ही ख़िलाफ़ काम करता है।इसका इलाज यह है कि आप इसका माल मत ख़रीदिए।

आप टेलीविज़न से कम्प्यूटर और अख़बार से वेबसाइट पर चले जाइए।हम पैसा भी ख़राब करें और विरोध भी झेलें।दो नुक़सान हम एक साथ बर्दाश्त नहीं करेंगे

इस अवसर पर नेशनल स्पीक के सम्पादक वसीम अकरमत्यागी ने कहाकि भारत में मीडिया की स्थिति को सुधारनेके लिए वैकल्पिक मीडिया की आवश्यकता है।नेशनल स्पीक इस आवश्यकता को पूरा करेगा।

उन्होंने दोहरायाकि मीडिया बाज़ार को प्राथमिकता देता है,सेवा और हितको नहीं जबकि वैकल्पिक मीडिया सरोकार की पत्रकारिताकरता है।

उन्होंने नेशनल स्पीक के माध्यम से लोगों के मुद्दोंको प्रमुखता से उठाने का वादा करते हुए भीम आर्मी केसंस्थापक चन्द्रशेखर आज़ाद का शुक्रिया अदा किया।त्यागी ने कहाकि में सामन्तवाद और ब्राह्मणवाद की जड़ेंअधिक गहरी हैं।

यही वजह है कि समाज आर्थिक स्तर केअतिरिक्त जाति एवं धर्म के आधार पर बंटा है।यह बंटवारा ख़तरनाक स्तर तक नस्लवादी है।

इसके दुष्परिणाम कोरेखांकित करते हुए उपेक्षित दलित,बहुजन,मूलनिवासी,ट्राइबल,मुस्लिम और महिलाओं के मुद्दों को नेशनल स्पीककवर करता रहेगा।

त्यागी ने अपने निजी अनुभव बाँटतेहुए कहाकि वह भी ट्रॉल एवं मीडिया माफिया के शिकार हैंलेकिन वह हार नहीं मानेंगे।उन्होंने सत्य की शक्ति के बलपर अपनी पोर्टल एवं एप्लीकेशन को आगे बढ़ाते रहने काआश्वासन दिया।

इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रशांत टंडन ने कहाकि मुख्य संस्थानों पर वर्चस्वादी ताक़तों का कब्ज़ा है।आर्थिक उदारीकरण के बाद से जिस समाज का भला हुआ वह भी वर्चस्ववादी ताक़तें ही थीं।

तकनीकी विकास के बाद छोटे शहरों तक समृद्धि पहुँची जिसने नए स्किल की माँग की।इन छोटे शहरों के हाशिये पर डाले गए दलित,ट्राइबल,मुस्लिम,अन्य पिछड़ा वर्ग पैदा हुआ।

इस नए आर्थिक पिछड़े वर्ग ने अपनी दूसरी पीढ़ी तक आर्थिक प्रगति हासिल की।यहाँ से दलित,ट्राइबल,मुस्लिम,अन्य पिछड़ा वर्ग ने नीति में अपना प्रतिनिधित्व मिला।हम आज उसी दौर में हैं और यही वजह है कि प्रोफेसर आनन्द को गिरफ्तार किया जाता है।

यह डर ही चन्द्रशेखर आज़ाद को गिरफ्तार कर उन्हें जेल तक पहुँचाता है।यह डर पिछड़ों से हैं और इस साज़िश को समझना होगा।यह मुख्यधारा नहीं,अतिवादी मीडिया है जिन्होंने आज से 10 साल पहले किए अपने सर्वे में पाया कि दलित, ट्राइबल,मुस्लिम,अन्य पिछड़ा वर्ग की भागीदारी मीडिया में 10 प्रतिशत और महिलाओं की भागीदारी 3 प्रतिशत से भी कम है।यह भागीदारी बढ़ानी चाहिए।जिसे आप बहुसंख्यकवाद कहते हैं,वही मनुवादी हैं।

सोशल मीडिया की भागीदारी को समझिए। ईरान से हमें सीखना चाहिए जो प्रतिबंध और अमेरिकी प्रोपैगैंडा के बावजूद अपने प्लैटफॉर्म बना लिए हैं।वह फेसबुक,ट्वीटर और यूट्यूब के मोहताज नहीं बल्कि अपने डिजिटल प्लैटफॉर्म के साथ अपनी बात कह रहे हैं।फेक न्यूज़ में भी सोशल मीडिया की भागीदारी है

इस अवसर पर कार्यक्रम में एप्लीकेशन के डवलपरआसिम शेख़,भीम आर्मी के सलाहकार डॉ. कुश,समाजसेवी अबुज़र क़ुरैशी,शामिर क़ुरैशी समेत कई गणमान्य व्यक्ति कार्यक्रम में मौजूद थे।
इस लिंक पर क्लिक करके आप एप डाउनलोड कर सकते है-नेशनल स्पीक एप को यहाँ से डाउनलोड करे

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