खड़े होकर नहाने से पहले नबी करीम(स.अ.व.) का ये फरमान ज़रूर पढ़ ले…

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दोस्तों आज के समय में मुस्लिम समाज में भी पश्चिमी सभ्यता फल फूल रही है लोग अदब को भूल रहे है और पश्चिमी कल्चर को अपना रहे है.आज आप को हम ऐसी ही एक चीज़ से रूबरू कर रहे है.इस्लाम में गुस्ल फर्ज़ है.गुस्ल और नहाना एक ऐसी चीज़ है जो सिर्फ इस्लाम में ही है.आज हम आपको नहाने के बारे में बताने जा रहे है.

हज़रत आईशा सिद्दीक़ा रज़ी अल्लाहु अनहा हुज़ूर-ए-अकरम सललल्लाहु ताला अलैहि वाला वसल्लम के ग़ुसल करने का तरीक़ा बयान करते हुए फ़रमाती हैं,हुज़ूर-ए-अकरम सललल्लाहु ताला अलैहि वाला वसल्लम जब ग़ुसल जनाबत करते तो पहले दोनों हाथ धोते,फिर दाएं हाथ से बाएं हाथ पर पानी डाल कर इस्तंजा करते,(यानी पेशाब के मक़ाम को धोते) उस के बाद मुकम्मल वुज़ू करते,फिर पानी लेकर सर पर डालते और उंगलीयों की मदद से बालों की जड़ों तक पानी पहुंचाते,फिर जब देखते कि सर साफ़ हो गया है तो तीन मर्तबा सर पर पानी डालते,फिर तमाम बदन पर पानी डालते और फिर पांव धो लेते।….मुस्लिम,अलसहीह,(जिल्द नमबर 1 पेज नंबर 253,हदीस नंबर 316)

ऊपर जो हदीस बयान हुई है,उस की रोशनी में ग़ुसल का मस्नून-ओ-मुस्तहब तरीक़ा ये है कि सबसे पहले नीयत करे।बिसमिल्लाह से इब्तिदा करे।दोनों हाथों को कलाइयों तक धोए।इस्तंजा करे ख़ाह नजासत लगी हो या ना लगी हो।फिर वुज़ू करे जिस तरह नमाज़ के लिए किया जाता है अगर ऐसी जगह खड़ा है।जहां पानी जमा हो जाता है तो पांव को आख़िर में ग़ुसल के बाद धोए।

तीन बार सारे जिस्म पर पानी बहाए।पानी बहाने की इब्तिदा सर से करे।इस के बाद दाएं कंधे की तरफ़ से पानी बहाए।फिर बाएं कंधे की तरफ़ पानी बहाने के बाद पूरे बदन पर तीन बार पानी डाले।वुज़ू करते वक़्त अगर पांव नहीं धोए थे तो अब धो ले।अगर इंसान नापाकी की हालत में गुसल कर रहा है,तो उसके लिए तीन चीज़ें ज़रूरी हैं.

अगर वह यह तीन चीज़ें नहीं करेगा तो पाक नहीं होगा।पहला कुल्ली करना,दूसरा नाक में नरम हड्डी तक पानी डालना,तीसरे पूरे बदन पर इस तरह से पानी बहाना कि कहीं पर भी बाल के बराबर भी सूखा न रहे।बैठ कर ग़ुसल करना मुस्तहब है।अगर बेपर्दगी ना हो,तो खड़े हो कर भी ग़ुसल कर सकते हैं लेकिन बैठ कर करना ज़्यादा बेहतर है,इसलिए कि इस में पर्दा ज़्यादा है।

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