मतदान से पहले ही BJP का एक और सहयोगी दल हुआ नाराज़,कहा-कहा गठबंधन तोड़ने का..

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लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण का मतदान 19 मई को होना है,आखरी चरण में सभी पार्टियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है,अभी अंतिम चरण का मतदान नही हुआ है लेकिन इससे पहले ही एनडीए में उठापटक शुरू हो गयी है.जहाँ भाजपा एनडीए में और पार्टियों को लाना चाह रही है लेकिन अभी उनके ही एक सहयोगी दल ने भाजपा से अलग होने का संकेत दिया है.

मणिपुर में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन की सहयोगी पार्टी एनपीएफ ने कहा है कि पार्टी उसके विचारों और सुझावों को तवज्जो नहीं दे रही है.एनपीएफ ने शनिवार को इस बात पर फैसला करने के लिये अऋ पने नेताओं की बैठक बुलायी है कि उसे गठबंधन में बने रहना है या अपना समर्थन वापस लेना है.

इन आरोपों को खारिज करते हुए भाजपा ने कहा कि उसने सरकार के सुचारू कामकाज को सुनिश्चित करने के लिये अपने सहयोगियों को हरसंभव सुविधाएं दी हैं.नगा पीपुल्स फ्रंट एनपीएफ के प्रदेश इकाई के प्रमुख अवांगबू नेवमई ने दावा किया कि भाजपा अपने गठबंधन सहयोगियों को तुच्छ समझती है.

इस बारे में विस्तृत जानकारी दिये बिना उन्होंने कहा, ‘‘2016 में गठबंधन सरकार के गठन के बाद से भाजपा ने कभी गठबंधन की मूल भावना का सम्मान नहीं किया.ऐसे कई मौके आये जब उनके नेताओं ने हमारे सदस्यों को गठबंधन सहयोगी मानने से इनकार किया.’’

60 सदस्यीय विधानसभा में एनपीएफ के चार विधायक हैं.हमारे चारों विधायकों में से लोशी दिखो मंत्री हैं,जो माओ विधानसभा सीट से विधायक हैं.नेवमई ने यह भी कहा कि भगवा पार्टी ने अपने गठबंधन सहयोगियों को जो वादे किये थे उसे कभी पूरा नहीं किया.उन्होंने दावा किया,‘‘एनपीएफ ने हमेशा भाजपा को अपने बड़े भाई की तरह समझा है लेकिन यह भगवा पार्टी को हमें झांसा देने से नहीं रोक पाया.हमें उचित सम्मान नहीं मिला.’’

नेवमई के दावों को गलत बताते हुए मणिपुर में भाजपा प्रवक्ता सीएच बिजॉय ने कहा कि एनपीएफ ने गठबंधन में शामिल होने के दौरान कहा था कि उसे मंत्री पद नहीं चाहिए लेकिन अब ऐसा लगता है कि पार्टी की कई मांगें हैं.उन्होंने कहा,‘‘एनपीएफ की मांगें पूरी तरह निराधार और बेबुनियाद हैं.सरकार के सुचारू कामकाज के लिये हमारे गठबंधन सहयोगियों को हरसंभव सुविधाएं दी गयी हैं.’’

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