जूते चप्पल पहनने और उतारते हुए इस सुन्नत का करे अमल….मोमिन की बदल जाएगी जिंदगी

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दोस्तों दुनिया के जितने भी मज़हब है उन्होंने अपने मानने वालो के लिए कुछ नियम बनाये है लेकिन अगर सभी धर्मो का तुलनात्मक अध्यन किया जाए तो एक बार सामने आती है इस्लाम धर्म में अपने मानने वालो के लिया काफी ज्यादा नियम है इस्लाम इसे मानने पर जोर देता है.इस्लाम के अनुसार,यदि कोई मोमिन किसी एक सुन्नत को ही पाबन्दी के साथ अमल करे फिर उसकी आखरत में कामयाबी होनी तय है.

इसलिए आप ने देखा होगा मुस्लिम धर्मगुरु सुन्नत पर चलने का मुस्लिम समुदाय पर जोर देते है.आज हम ऐसी ही एक सुन्नत के बारे में बताने जा रहां है जिसको हम आसानी से कर सकते है.और सबसे अच्छी बात है अगर आप इस सुन्नत को करने लगे फिर दर्जनों बार आप इस सुन्नत को कर सकेंगे.आज हम बताने जा रहे है जूते और चप्पल पहनने की सुन्नत के बारे में.

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आप को हम मुस्लिम शरीफ में मौजूद एक हदीस को बताने जा रहे है.पैगंबर हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया-यदि तुम में से कोई चप्पल पहने तो दाहिने से शुरू करे,जब उतारे तो बायें से शुरू करे और यदि पहने तो दोनों को पहने या उसे उतार ही दे.दोस्तों एक मुस्लिम को दिन और रात में कई बार इस सुन्नत को करने का मौका मिलता है है,मसजिद को जाते समय और निकलते समय,बाथरूम में प्रवेश करते समय और निकलते समय,घर से काम को जाते समय,और वहाँ से आते समय,इस सुन्नत की ज़रूरत पड़ती है.इस तरह जूते-चप्पल पहनने की सुन्नत दिन-रात में कई बार की जा सकती है,अगर मुस्लिम पहनने-उतारने में इस सुन्नत का ख्याल रखा जाए तो उसे शवाब मिलेगा और उसके कामो में भी बरकत होगी.

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