सेमिनार के अंतिम सत्र में जामिया यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार और मशहूर नारीवादी उमा चक्रवती हुईं शामिल

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जामिया मिल्लिया इस्लामिया के सरोज़िनी नायडू सेंटर फ़ॉर विमेंस स्टडीज़ में चल रहे दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आज यानी 29 नवंबर को आख़िरी दिन था।सेमिनार में पूरे तीन सत्रों का आयोजन किया गया और आख़िर में समापन सत्र का आयोजन हुआ। इस समापन सत्र में जामिया के रजिस्ट्रार ए पी सिद्दीक़ी,देश की जानी मानी इतिहासकार और नारीवादी उमा चक्रवती,डीयू के गार्गी कॉलेज की पूर्व प्रिंसिपल डॉ हेमा राघवान शामिल हुईं।

ए पी सिद्दीक़ी ने सेमिनार में छात्रों को सम्बोधित करते हुए कहा कि जामिया छात्राओं को पढ़ने और उनके विकास के लिए एक बेहतरीन प्लाट्फ़ोर्म प्रदान करता है। उन्होंने आगे सबीहा हुसैन का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि सरोजिनी नायडू सेंटर फ़ॉर वीमेन स्टडीज़ ने यह सेमिनार आयोजित कर के छात्राओं को एक बेहतरीन मौक़ा दिया है।

वहीं उमा चक्रवती ने अपने सम्बोधन में ब्राह्मणवाद पित्रसत्ता के बारे में बात करते हुए बताया कि जातिवादी प्रथा और उससे सम्बंधित पित्रसत्ता का ख़त्म होना भी बेहद ज़रूरी है और आजकल यह मुद्दा काफ़ी विवादों में हैं। वहीं डॉ हेमा राघवान ने भी लिंग भेदभाव और लिंग बराबरी पर ज़ोर देते हुए बात की और उन्होंने कहा कि जब भारतीय संविधान में महिलाओं को बराबरी दी गयी है तो फिर महिलाएँ 33 प्रतिशत आरक्षण की बात क्यूँ करती हैं जिसकी कोई ज़रूरत नहीं हैं।

आपको बता दें कि आख़िरी दिन कुल तीन सेशन का आयोजन किया गया जिसमें ओड़िसा और मेघालय जैसे क्षेत्रों में महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा की बात कही गयी।जबकि देश के कुल 17 राज्यों के डेलिगेट्स ने इस सेमिनार में अपना पेपर प्रस्तुत किया।आख़िर में जामिया के रजिस्ट्रार ए पी सिद्दीक़ी ने लीगल राइट्स ऑफ वीमेन से सम्बंधित प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार दिया और सर्टिफ़िकेट दिए। इस सेमिनार में असोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज के डायरेक्टर रिसर्च अमरेन्द्र पानी भी शामिल रहे।

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