इस दिग्गज फिल्म हस्ती ने दुनिया को कहा अलविदा,फूंट फूंट कर रोये धमेंद्र,काजोल….

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फ़िल्मी दुनिया में कुछ ऐसे दिग्गज आये जिन्होंने बॉलीवुड के ट्रेंड को बदल दिया.दिलीप कुमार,राजेंद्र कुमार,राजेश खन्ना,अमिताभ बच्चन जैसे दिग्गजों ने फ़िल्मी दुनिया में नयी धारा बनाई,इसी तरह की एक हस्ती का नि’धन हुआ जिसने फिल्मो में एक्शन को ऐसा पिरोया जिसने बॉलीवुड में एक्शन फिल्मो का एक ट्रेंड चला दिया.

फिल्म अभिनेता अजय देवगन के पिता और स्टंट मास्टर वीरू देवगन का मुंबई में सोमवार को नि’धन हो गया था.वीरू देवगन एक प्रसिद्ध स्टंट मास्टर थे.उन्होंने कई सुपरहिट फिल्मों के स्टंट कोरियोग्राफ किये थे.इसके लिए उन्हें कई पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया.इस समय उनका पूरा परिवार शोकाकु’ल है.


फिल्म अभिनेता अजय देवगन के पिता वीरू देवगन ने सोमवार को मुंबई में अंतिम साँसे ली.उनकी तबियत बहुत समय से खराब चल रही थी.वीरू देवगन की मौत पर धमेंद्र भी रोने लगे,काजोल और सलमान समेत कई फ़िल्मी हस्तियों के आंसू नहीं रुक रहे थे.मुंबई में 27 मई 19 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा.वीरू मशहूर स्टंट और एक्शन कोरियोग्राफर और डायरेक्टर थे.

उन्होंने करीब 80 से अधिक फिल्मों में एक्शन कोरियोग्राफ करने का काम किया था.इसके अलावा उन्होंने ‘हिंदुस्तान की कसम’ नामक फिल्म का निर्देशन भी किया था.सन 1957 में 14 साल के वीरू देवगन बॉलीवुड में घुसने की चाह लिए अमृतसर में अपने घर से भाग गए,बिना टिकट लिए बंबई जाने के लिए फ्रंटियर मेल पकड़ ली और पकड़ें गये टिकट नहीं लेने के कारण दोस्तों के साथ हफ्ते भर जेल में रहे थे.

बाहर निकलने पर बंबई शहर और भूख ने उनको तोड़ दिया था.जहां उनके साथ आए कुछ दोस्त टूटकर अमृतसर वापिस लौट गए लेकिन वीरू देवगन नहीं गए.वह टैक्सियां धोने लगे और कारपेंटर का काम करने लगे,हौसला लौटने पर फिल्म स्टूडियोज़ के चक्कर काटने लगे.उन्हें हीरो बनना था लेकिन उन्हें जल्द ही समझ आ गया कि हिंदी फिल्मों में जो चॉकलेटी चेहरे हीरो और अभिनेता बने हुए हैं,उनके सामने उनका कोई चांस नहीं है.

वीरू देवगन ने अपने बेटे अजय देवगन को हीरो बनाने के लिए बहुत कड़ी मेहनत की है.उन्हें कम उम्र से ही फिल्ममेकिंग,और एक्शन से जोड़ा.ये सब अजय के हाथों ही करवाते थे.कॉलेज गए तो उनके लिए डांस क्लासेज शुरू करवाईं गई.घर में ही जिम बनावाया गया.हॉर्स राइडिंग सिखाया और फिर उन्हें अपनी फिल्मों की एक्शन टीम का हिस्सा बनाने लगे.

उन्हें बताने लगे कि सेट का माहौल कैसा होता है.जिसके चलते आज अजय फिल्ममेकिंग को लेकर बहुत सक्षम हो पाए है.उन्होंने Inkaar(1977),Mr.Natwarlal(1979),Kranti(1981),Himmatwala(1983),Shahenshah(1988),Tridev(1989),Baap Numbri Beta Dus Numbri(1990),Phool Aur Kaante (1991) जैसी फिल्मों में एक्शन निर्देशन किया था.

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