इमरान मसूद ने BSP में लगा दी सेंध,मुस्लिम नेताओ की मसूद के लिए गोलबंदी से BSP की नींद उड़ी

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वेस्ट यूपी की सियासत में एक नया अध्याय जुड़ने वाला है.चार दशक तक राजनीति में दबदबा रखने वाले नेता और नौ बार सांसद रहे काजी रशीद मसूद ने बसपा से बगावत कर दी है.रशीद मसूद ने सोमवार को अपने भतीजे और कांग्रेस नेता इमरान मसूद का चुनाव में साथ देने की घोषणा कर दी है.इसे लेकर सियासी गलियारों में खासी खलबली देखी जा रही है.

सोमवार को कांग्रेस उपाध्‍यक्ष इमरान मसूद और बसपा नेता शादान मसूद ने संयुक्‍त प्रेस कांफ्रेंस की.इसमें इमरान मसूद ने कहा कि शादान मसूद का स्‍वागत है.वह चाचा रशीद मसूद का भी स्‍वागत करते हैं पिछले कुछ साल से परिवार के अंदर की खटास दूर हो गई है.कांग्रेस प्रदेश उपाध्‍यक्ष इमरान मसूद को उनके चचेरे भाई एवं बसपा नेता शादान मसूद ने समर्थन देने का ऐलान कर दिया है.

उधर अब देखना है कि बसपा पूर्व सांसद और केन्द्रीय मंत्री रहे काजी रशीद मसूद के खिलाफ क्या रुख अपनाती है फिलहाल बसपा नेता काजी रशीद मसूद को जिले का बड़ा कद्दावर नेता माना जाता है.कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष इमरान मसूद उनके भतीजे हैं।काजी रशीद मसूद पांच बार लोकसभा सदस्य और चार बार राज्यसभा सदस्य के साथ केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री भी रहे हैं.

उन्होंने पहला लोकसभा चुनाव इमरजेंसी के तुरंत बाद 1977 में लड़ा था।वह जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव मैदान में कूदे और जीत दर्ज की।इसके बाद जनता पार्टी (सेक्यूलर) में शामिल हो गए।वर्ष 1989 का चुनाव उन्होंने जनता दल से लड़ा और फिर जीत दर्ज की।इस दौरान वह 1990 और 91में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री भी रहे।वर्ष 1994 में सपा में शामिल हो गए। बाद में उन्होंने 1996 में इंडिन एकता पार्टी बनाई।वर्ष 2003 में सपा का दामन थाम लिया।वर्ष 2004 में उन्होंने सपा के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीते। फिर यह कांग्रेस में आ गए।

उसी दौरान वह स्वास्थ्य मंत्री रहने के दौरान एमबीबीएस के भर्ती मामले के दौरान जेल भी गए।उसके बाद सपा में एंट्री हो गई।इस पूरे सियासी सफर में कांग्रेस नेता इमरान मसूद उनके साथ साए की तरह लगे रहे।वर्ष 2014 की लोकसभा की टिकट को लेकर खटास आ गई.काजी रशीद मसूद के बेटे शाजान मसूद ने लोकसभा चुनाव सपा के टिकट पर लड़ा.

जबकि कांग्रेस ने इमरान मसूद को मैदान में उतारा,इस चुनाव में इमरान मसूद ने चार लाख से अधिक वोट लेकर सभी को चौंका दिया.वहीं शाजान मसूद को महज 52 हजार वोटों पर ही संतोष करना पड़ा.उसके बाद काजी रशीद मसूद ने फिर पार्टी बदली और बसपा में शामिल हो गए.इस सबके साथ ही उन्हें लोकसभा के 1996, 1998, 99 और 2009 के चु्नाव में हार भी का सामना करना पड़ा.

शाज़ान मसूद बसपा से टिकट चाहते थे लेकिन उनके बजाय बसपा ने मीट कारोबारी फजुल रहमान को टिकट दे दिया है.बीते दिनों शाजान मसूद ने कहा भी था कि पार्टी यदि किसी राजनेता के बजाय कारोबारी को टिकट देती है तो वह सोच-विचार करेंगे.शायद इसी का परिणाम माना जा रहा है कि काजी रशीद मसूद और उनके बेटे पार्टर्ी से बगावत पर करने पर उतारू हो रहे हैं.

शाज़ान मसूद

परिवार एक होने के नंवबर में मिल गए थे संकेत
करीब दस साल तक एक दूसरे साथ रहे काजी रशीद मसूद और इमरान मसूद के एक साथ आने के संकेत बीते साल नवंबर माह में ही मिल गए थे. इमरान मसूद की भतीजी का निकाह था.उसमें पूर्व केन्द्रीय मंत्री काजी रशीद मसूद परिवार के साथ शामिल रहे थे.हालांकि यह देखकर लोगों में सुगबुगाहट जरूर हुई थी लेकिन परिवार की बेटी के निकाह का कार्यक्रम होने के चलते चर्चा कुछ दिन बाद खत्म हो गई.

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