शौहर से बीबी कितने दिन तक दूर रह सकती है?…हज़रत उमर (र.अ.) ने फ़रमाया

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इस्लाम एक ऐसा मज़हब है जो पत्नी और पति दोनों को एक दायरे में रहने की हिदायत देता है.इस्लाम में मर्द और औरत कितने दिन तक दूर रह सकते है और क्या क्या तहजीब दोनों के बीच होनी चाहिए इसका सब इस्लाम में तफसील से बताया गया है आज हम हजरत उमर (र.अ.) के मियां और बीबी को दी गयी हिदायत के बारे में बताने जा रहे है.

सय्यदना हज़रत उमर रज़ी अल्लाहु अनहु के पास काब असदी रज़ी अल्लाहु ताला अनहु तशरीफ़ फ़र्मा थे इसी दौरान एक ख़ातून आई और कहने लगी, अमीर-ऊल-मोमनीन!मेरा शौहर बहुत नेक है,सारी रात तहज्जुद पढ़ता रहता है,सारा दिन रोज़ा रखता है,ये कह कर ख़ामोश हो गई,सय्यदना हज़रत उमर रज़ी अल्लाहु अनहु बड़े हैरान कि ख़ातून क्या कहने आई है?उसने फिर यही बात दुहराई कि मेरा शौहर बहुत नेक है,सारी रात तहज्जुद में गुज़ार देता है और सारा दिन रोज़ा रखता है.

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इस पर हज़रत काब रज़ी अल्लाहु ताला अनहु बोले:ए अमीर-उल-मोमिनीन!उसने अपने शौहर की बड़े अच्छे अंदाज़ में शिकायत की है,सय्यदना हज़रत उमर रज़ी अल्लाहु अनहु ने फरमाया कैसे शिकायत की?तो उन्होने अर्ज़ क्या कि अमीर-उल-मोमिनीन!जब वो सारी रात तहज्जुद पढ़ता रहेगा और सारा दिन रोज़ा रखेगा तो फिर बीवी को वक़्त कब देगा?तो कहने आई है कि मेरा शौहर नेक तो है।मगर मुझे वक़्त नहीं देता।

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चुनांचे सय्यदना हज़रत उमर रज़ी अल्लाहु अनहु ने इस के शौहर को बुलाया,और इस बारे में पूछा तो उन्होने कहा:हाँ मैं मुजाहिदा करता हूँ,ये करता हूँ,वो करता हूँ,सय्यदना हज़रत उमर रज़ी अल्लाहु अनहु ने हज़रत काब से कहा कि आप फ़ैसला करें,हज़रत ने इन साहिब से कहा कि देखो! शरीयत में तुम्हारे लिए ज़रूरी है कि तुम अपनी बीवी के साथ वक़्त गुज़ारो,हंसी ख़ुशी उस के साथ रहो और कम अज़ कम हर तीन दिन के बाद अपनी बीवी के साथ हमबिसतरी करो,ख़ैर वो मियां बीवी तो चले गए.

तो सय्यदना हज़रत उमर रज़ी अल्लाहु अनहु ने अबी बिन काब से पूछा:आपने ये शर्त क्यों लगाई कि हर तीन दिन के बाद बीवी से मिलाप करो?उन्होंने कहा:देखें!अल्लाह ताला ने मर्द को ज़्यादा से ज़्यादा चार शादीयों की इजाज़त दी,चुनांचे अगर चार शादियां भी किसी ने की हों,तो तीन दिन के बाद फिर बीवी का नंबर आता है,तो मैंने इस से कहा कि तुम ज़्यादा से ज़्यादा तीन दिन इबादत कर सकते हो तीन दिन के बाद एक दिन रात तुम्हारी बीवी का हक़ है,तुम्हें गुज़ारना पड़ेगा,तो देखो शरीयत इन्सान को क्या ख़ूबसूरत बातें बताती है।

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