बेवफा बीबी और वफादार बीबी की क्या पहचान है?,हज़रत अली ने फ़रमाया..

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नेक औरतें वो हैं जो फ़र्मांबरदार और शौहर की अदमे मौजूदगी में अल्लाह की हिफ़ाज़त में (माल व इज्ज़त) की हिफ़ाज़त करने वाली हैं।(सूरे निसा)
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछा गया कि सबसे बेहतरीन औरत कौन सी है?,आप ने ने फ़रमाया:वो औरत जब शौहर उसे देखे तो ख़ुश कर दे और जब शौहर हुक्म दे तो इस की इताअत करे और अपनी जान व माल में शौहर का नापसंदीदा काम ना करे और इस की मुख़ालिफ़त ना करे।

हज़रत हुसैन बिन मुहसिन से रिवायत है कि मुझे मेरी फूफी ने बताया कि मैं किसी काम से अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ख़िदमत में हाज़िर हुई तो आपने पूछा कि ये कौन औरत है? क्या शौहर वाली है? मैंने कहा हाँ!फिर आपने पूछा शौहर के साथ तुम्हारा रवैय्या कैसा है?मैंने कहा: मैंने कभी उस की इताअत और ख़िदमत में कसर नहीं छोड़ी सिवाए उस चीज़ के जो मेरे बस में ना हो।फिर आपने पूछा कि अच्छा ये बताओ तुम उस की नज़र में कैसी हो? याद रखो वह तुम्हारी जन्नत और जहन्नुम है। (मूसनद अहमद)

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औरत की मुहब्बत और इस की इताअत का सबसे ज़्यादा हक़दार शौहर है।इस का अंदाज़ा इस बात से बख़ूबी लगाया जा सकता है कि नमाज़ इबादत की निहायत आला क़िस्म है और सजदा उस की चोटी है लेकिन शरीयत ने शौहर का मुक़ाम व मरतबा वाज़िह करने के लिए इतनी ऊंची मिसाल बयान किया है।सय्यदना आबु हुरैरा रज़ी अल्लाहु ताला अनहु से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया।अगर मैं अल्लाह के सिवा किसी और को सजदा करने का हुक्म देता तो मैं बीवी को अपने शौहर को सजदा करने का हुक्म देता। (सुनन तिरमिज़ी)

फिर आपऐ ने फ़रमाया उस ज़ात की क़सम जिसके हाथ में मेरी जान है!औरत अपने रब का हक़ अदा नहीं कर सकती जब तक वो अपने शौहर का पूरा हक़ अदा ना करे।शौहर अगर उसे बुलाए और वो सवारी पर हो तब भी अपने आपको ना रोके।सही हदीस में है कि जिस शौहर को औरत से तकलीफ़ पहुँचती है जन्नत की हूरें उसे बददुआ देती हैं।

मुस्लमान औरत के लिए पर्दा इस्लाम की ख़सुसीआत और इस के मुहासिन में से है।पर्दा में मुस्लमान औरत की इज़्ज़त की हिफ़ाज़त है।पर्दा एक रहमत है इस्लाम ने औरत को इंतिहाई बेशक़ीम क़रार दिया है।इसलिए उस की हिफ़ाज़त का ख़ुसूसी एहतिमाम किया है,ज़माना-ए-जाहिलीयत में पर्दा का कोई रिवाज नहीं था पर्दा सिर्फ और सिर्फ इस्लामी हुक्म है।इस लिए जो औरत प्रदा करती है,वह अच्छी औरत होती है।

कोई औरत अपने शौहर की मौजूदगी में इस की इजाज़त के बग़ैर नफ़ली रोज़ा ना रखे। (बुख़ारी),शौहर की इजाज़त के बग़ैर किसी को घर में दाख़िल होने की इजाज़त ना दे।जब भी कोई मर्द किसी अजनबी औरत के साथ ख़लवत में होता है तो उनमें तीसरा शैतान होता है। (तिरमिज़ी)

शौहर की इजाज़त के बग़ैर किसी ग़ैर मुहर्रम से बात ना करे,कुरान पाक में आया है कि ए अजवाजे नबी! तुम दीगर औरतों की तरह नहीं हो अगर तुम्हें ख़ौफ़ है पस तुम अपनी आवाज़ में लचक ना पैदा करो जिससे मरीज़ दिल-ए-इंसान लालच कर बैठे और तुम भली और दरुस्त बात करो।(सूरे अहजाब)

औरत की आवाज़ भी पर्दा है वो अजनबी मर्द के साथ इन शराइत के साथ बात कर सकती है। नंबर1-आवाज़ में लचक शीरीनी और मिठास ना हो। नंबर2-सिर्फ़ बक़दर ज़रूरत बात करे। नंबर 3 पर्दे की ओट से बात करे।इरशाद रब्बानी है,और जब तुम इन (अजवाज-ए-नबी) से कोई चीज़ माँगो तो पर्दे के पीछे से माँगो ये तुम्हारे और उनके दलों के लिए कामिल पाकीज़गी है।(सूरे अहजाब)

इस आयत में अगरचे नबी की बीवियो से ख़िताब किया गया है मगर ये हुक्म उम्मत की सारी ख़वातीन को शामिल है,जब उम्मत की माँ से पर्दा की ओट से मांगने का हुक्म दिया गया है,जबकि वहां शक की कोई गुंजाइश नहीं तो वो ख़वातीन जिन्हें ये मुक़ाम हासिल नहीं उन पर पर्दा करना और ज़रूरी मालूम होता है।अकेले औरत का बाज़ार जाना भी दरुस्त नहीं क्योंकि बसा-औक़ात दुकान में सेल्ज़ मैन के सिवा कोई नहीं होता।फिर इस से नाजायज़ ख़लवत हासिल हो जाती है।

शौहर की इजाज़त के बग़ैर घर से बाहर ना निकले,किसी अजनबी मर्द से मुसाफ़ा ना करे:नबी करीमऐ का इरशाद है-तुम में से किसी के सर को लोहे की सूई से कचोके लगाना इस बात से बेहतर है कि वो किसी अजनबी औरत को छूए। (तिबरानी)

शौहर के माल की हिफ़ाज़त करे,नबी करीम इरशाद फ़रमाते हैं,तुम में से हर एक निगहबान है और इस से इस की रियाया के बारे में बाज़पुर्स होगी।
जन्नती औरत की पहचान.नबी करीम का इरशाद है:-जो औरत पाँच वक़्त की नमाज़ पढ़े एक माह का रोज़ा रखे अपनी शर्मगाह की हिफ़ाज़त करे और अपने शौहर की इताअत करे ऐसी औरत से कहा जाएगा जन्नत की जिस दरवाज़े से चाहो दाख़िल हो जाऐ।

सय्यदना अनस बिन मालिक फ़रमाते हैं कि अल्लाह के रसूल ने फ़रमाया-क्या मैं तुम्हें जन्नती औरतों का हाल ना बताउं?लोगों ने अर्ज़ किया: ज़रूर ए अल्लाह के रसूल!आप ने फ़रमाया: वो औरतें बहुत मुहब्बत करने वाली और बहुत बच्चे जनने वाली होती हैं जब वो ग़ुस्से होती हैं या उन्हें कोई तकलीफ़ पहुँचती है या उनका शौहर उनसे नाराज़ हो जाता है तो शौहर से कहती हैं:ये मेरा हाथ आपके हाथ में है इस वक़्त तक मेरी आँखों पर नींद हराम है जब तक आप राज़ी ना हो जाएं।ऊपर जितनी बातें बयान हुई हैं,यह सब एक अच्छी और वफादार औरत की पहचान है,औरतों को अपने अंदर यह आदात ज़रूर पैदा करनी चाहिए,वहीं जो औरतें इसके उलट काम करती हैं,उन्हें बेवफा कहा गया है।

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