घर में बुरा नही होगा,वास्तु दोष दूर करने के लिए तुलसी के पौधे का ऐसे करे प्रयोग

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TULSI PLANT Photo Source-Hindustan

घर में वास्तु से जुड़े दोष होते हैं तो परिवार को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। किसी भी काम में आसानी से सफलता नहीं मिल पाती है।ऐसे में कई तरह के उपाय बताए जाते हैं,लेकिन यह अनेक बार कठिन होने के साथ ही ऐसे भी होते हैं जो साधारण मनुष्य के लिए कर पाना संभव नहीं होता।इन परिस्थितियों में साधारण दिखने वाला तुलसी का पौधा आपकी अनेक मुश्किलों का समाधान कर सकता है।अनेक दिनों से चली आ रही घर की कलह से भी आप शांति प्राप्त कर सकते हैं।हम आपको कुछ ऐसे ही उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं।तुलसी का पौधा घर में होने से पवित्रता का संचार होता है।परिवार में सुख शांति व समृद्धि बनी रहती है।कहा जाता है कि तुलसी का पौधा रखने से कहीं भी भूत-प्रेत व अनावश्यक शक्तियां घर पर नहीं आतीं।

जिससे घर पर कलह का वास नहीं होता और समृद्धि आती है।शरद पूर्णिमा से तुलसी के पौधे के नीचे दीपक जलाने की परंपरा है,जिसका सीधा अर्थ भी वास्तु से जुड़ा है,माना जाता है कि ऐसा करने से देवों का आगमन घर पर होता है और उनके आशीर्वाद से धन का आवागमन घर पर लगा रहता है।कहा जाता है कि तुलसी के पत्ते में साक्षात् भगवान विष्णु का वास होता है।यदि तुलसी का पूजन प्रतिदिन विधि-विधान से किया जाए तो श्रीहरि की कृपा स्वतः ही प्राप्त हो जाती है।इसलिए भी तुलसी की परिक्रमा करना उपर्युक्त बताया गया है।भारतीय संस्कृति में यह पूज्य है। तुलसी का धार्मिक महत्व तो है ही लेकिन विज्ञान के दृष्टिकोण से तुलसी एक औषधि है।तुलसी को हजारों वर्षों से विभिन्न रोगों के इलाज के लिए औषधि के रूप में प्रयोग किया जा रहा हैं।

बता दें कि आयुर्वेद में तुलसी तथा उसके विभिन्न औषधीय प्रयोगों का विशेष स्थान हैं।आयुर्वेद में तुलसी को संजीवनी बूटी के समान माना जाता है।आपके आंगन में लगा छोटा सा तुलसी का पौधा,अनेक बीमारियो का इलाज करने के आश्चर्यजनक गुण लिए हुए होता हैं।तुलसी में कई ऐसे गुण होते हैं जो बड़ी-बड़ी जटिल बीमारियों को दूर करने और उनकी रोकथाम करने में सहायक है।हृदय रोग हो या सर्दी जुकाम,भारत में सदियों से तुलसी का इस्तेमाल होता चला आ रहा है।औषधि ये गुणों से परिपूर्ण पौराणिक काल से प्रसिद्ध पतीत पावन तुलसी के पत्तों का विधिपूर्वक नियमित औषधितुल्य सेवन करने से अनेकानेक बीमारियाँ ठीक हो जाती है। 

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