फ़रिश्ते मु’र्दे से क्या पूछते है?,हर मोमिन के लिए ज़रूरी है इसे जानना…

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जब आदमी पर मौ त की हालत तारी होती है तो अल्लाह ताला की तरफ़ पाँच फ़रिश्ते आते हैं।पहला पहला फरिश्ता उस के पास उस वक़्त आता है जब उस की रूह हलक़ूम(यानी हलक़) तक पहुँचती है।वो फ़रिश्ता उसे पुकार कर कहता है:ए इब्न-ए-आदम!तेरा ताक़तवर बदन कहाँ गया?आज ये कितना कमज़ोर है?तेरी ज़बान कहाँ गई?आज ये कितनी ख़ामोश है? तेरे घर वाले और अज़ीज़ो अक़रबा कहाँ गए? तुझे किस ने तन्हा कर दिया।

फिर जब उस की रूह क़बज़ करली जाती है और कफ़न पहना दिया जाता है तो दूसरा फरिश्ता उस के पास आता है ओरा उसे पुकार कर कहता है :ए इब्न-ए-आदम!तू ने तंगदस्ती के ख़ौफ़ से जो माल जमा किया था वो कहाँ गया?तूने तबाही से बचने के लिए घर बसाए थे वो कहाँ गए?तूने तन्हाई से बचने के लिए जो चीज़ तैयार किया था वो कहाँ गया?

फिर जब उस का जनाज़ा उठाया जाता है तो तीसरा फ़रिश्ता उस के पास आता है और उसे पुकार कर कहता है:आज तो एक ऐसे लंबे सफ़र की तरफ़ जा रहा है जिससे लंबा सफ़र तू ने आज से पहले कभी तै नहीं किया.आज ऐसी क़ौम से मिलेगा कि आज से पहले कभी इस से नहीं मिला.आज तुझे ऐसे तंग मकान में दाख़िल किया जाएगा कि आज से पहले कभी ऐसी तंग जगह में दाख़िल ना हुआ था,अगर तू अल्लाह ताला की रज़ा पाने में कामयाब हो गया तो ये तेरी ख़ुशबख़ती है और अगर अल्लाह ताला तुझसे नाराज़ हुआ तो ये तेरी बदबख़ती है।

फिर जब उसे क़ब्र में उतार दिया जाता है तो चौथा फ़रिश्ता उस के पास आता है और उसे पुकार कर कहता है:ए इब्न-ए-आदम!कल तक तो ज़मीन की पीठ पर चलता था और आज तू उस के अंदर लेटा हुआ है,कल तक तू इस की पीठ पर हँसता था और आज तू उस के अंदर रो रहा है,कल तक तू इस की पीठ पर गुनाह करता था और आज तो उस के अंदर शर्मिंदा है।

फिर जब उस की क़ब्र पर मिट्टी डाल दी जाती है और इस के दोस्त व घर वाले उसे छोड़कर चले जाते हैं तो पांचवां फ़रिश्ता उस के पास आता है और उसे पुकार कर कहता है:ए इब्न-ए-आदम!वो लोग तुझे दफ़न कर के चले गए,अगर वो तेरे पास ठहर भी जाते तो तुझे कोई फ़ायदा ना पहुंचा सकते.तूने माल जमा किया और ग़ैरों के लिए छोड़ दिया आज या तो तुझे जन्नत के आली बाग़ात की तरफ़ फेरा जाएगा या भड़कने वाली आग में दाख़िल किया जाएगा।

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