पवित्र कुरान की वो सुराह जिसको मगरिब के बाद पढ़ने से आदमी दौलत मंद हो जाता है

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दोस्तों अमीरी गरीब इन्सान की मेहनत के साथ खुदा के करम की मोहताज़ है कभी कभी एक आदमी बहुत मेहनत करता है लेकिन उसको कामयाबी नही मिलती है,ऐसे लोगो की रोज़ी में अल्लाह की बरकत नही है.एक मुस्लिम तब तक खुशहाल नही हो सकता है जब तक उसका अल्लाह उससे राज़ी नही है.मोमिन की इबादत के बिना कामयाब होना मुमकिन नही है आज हम घर में खुशहाली को लेकर आपको जानकारी देने जा रहे है.

नबी(स.अ.व.) का फरमान पढ़े
हज़रत सहल बिन साद रज़ी अल्लाहु ताला अनहु की एक रिवायत है कि एक शख़्स ने नबी करीम सललल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आकर तंगी की शिकायत की तो आपने फ़रमाया “जब तुम अपने घर में दाख़िल हो तो सलाम करो चाहे वहां कोई मौजूद हो या ना हो,फिर मुझ पर सलाम पेश करो, और एक बार सूरा इख़लास पढ़ो”।चुनांचे उस शख़्स ने यूंही किया तो अल्लाह तआला ने इस पर रिज़्क़ की बारिश फ़र्मा दी,यहाँ कि इस के पड़ोसीयों और रिश्तेदारों को भी फ़ैज़याब किया।”

इस सुरत में है फ़ज़ीलत
सूरे इख़लास की बहुत फ़ज़ीलत आई है,नबी करीम सललल्लाहु अलैहि वसल्लम के ज़माने में एक शख़्स रात को क़ियाम में सिर्फ क़ुल हू अल्लाह अहद पढ़ता था इस से ज़्यादा कुछ नहीं पढ़ता था तो सुबह के वक़्त वो नबी करीम सललल्लाहु अलैहि वसल्लम की ख़िदमत में हाज़िर हुआ और नबी करीम सललल्लाहु अलैहि वसल्लम के सामने इस बात का तज़किरा किया गया.

और गोया कि साइल ने इस सूरत को क़लील जाना तो नबी करीम सललल्लाहु अलैहि वसल्लम फ़रमाने लगे इस ज़ात की क़सम जिस कि हाथ में मेरी जान है बेशक ये सूरत पूरे क़ुरआन के बराबर है।सही बुख़ारी (4627)

मुसनद अहमद की रिवायत
मुसनद अहमद की रिवायत में है कि अब्बू सईद ख़ुदरी रज़ी अल्लाहु ताला अनहु बयान करते हैं कि एक शख़्स ने नबी करीम सललल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहा कि मेरा एक पड़ोसी रात को क़ियाम में सिर्फ क़ुल हू अल्लाह अहद ही पढ़ता है,गोया कि उसे ने क़लील जाना,तो नबी करीम सललल्लाहु अलैहि वसल्लम फ़रमाने लगे-इस ज़ात की क़सम जिस कि हाथ में मेरी जान है बेशक ये सूरत पूरे क़ुरआन के बराबर है।

मुसनद अहमद (10965) में सूरे इख़लास पढ़ने की बहुत बरकत बयान की गई है,इस सूरत में अल्लाह ताला ने घर में बरकत रखी है,वहीं जो इंसान हमेशा सूरे इख़लास पढ़ता रहता है,उसे कोई परेशानी भी नहीं आती है।दोस्तों मुस्लिम को इसलिए सुरे इखलास को कसरत से पढना चाहिए.ये बरकत लाने का बेहतरीन अमल है.इस्लाम में वो सबसे बड़ा दौलतमंद है जो अल्लाह की इबादत में सबसे आगे रहता है.

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