पहली अज़ान का ये किस्सा हर मुस्लिम को पढना चाहिए,प्यारे नबी(स.अ.व.) ने फ़रमाया

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अज़ान नबी करीम सल्ल्ललाहु अलैहि वसल्लम के अह्द मुबारक में मदीना शरीफ़ में मशरू हुई,यहाँ पर हम हदीस पेश कर रहे हैं की किस तरह अज़ान की शुरुआत हुई.हज़रत नाफ़े रज़ी अल्लाहु ताला अन्हु बयान करते हैं कि इबन उम्र रज़ी अल्ल्लाहु ताला अन्हु कहा करते थे जब मुस्लमान मदीना आए तो वो नमाज़ के लिए जमा हुआ करते थे,नमाज़ के लिए अज़ान नहीं होती थी.

चुनांचे इस सिलसिला में एक रोज़ उन्होंने बातचीत की तो कुछ लोग कहने लगे ईसाईयों की तरह नाक़ूस बना लिया जाये और बाअज़ कहने लगे:यहूदीयों के सींग की तरह का बिगुल बना लिया जाये.चुनांचे उम्र रज़ी अल्लाहु ताला अन्हु कहने लगे तुम किसी शख़्स को क्यों नहीं मुक़र्रर करते कि वो नमाज़ के लिए मुनादी करे,तो रसूल करीम सलल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया बिलाल उठकर नमाज़ के लिए मुनादी करो सही बुख़ारी हदीस नंबर ( 569 )

और इबन अमीर बन अनस अपने एक अंसारी चचा से बयान करते हैं कि नबी करीम सलल्लाहु अलैहि वसल्लम को ये मसला दरपेश आया कि लोगों को नमाज़ के लिए कैसे जमा किया जाये?किसी ने कहा कि नमाज़ का वक़्त होने पर झंडा नसब कर दिया जाये जब वो उसे देखेंगे तो एक दूसरे को बता देंगे, लेकिन रसूल करीम सलल्लाहु अलैहि वसल्लम को ये तरीक़ा पसंद ना आया.

रावी बयान करते हैं कि बिगुल का ज़िक्र हुआ,ज़ियाद कहते हैं कि यहूदीयों वाला बिगुल चुनांचे रसूल करीम सलल्लाहु अलैहि वसल्लम को ये भी पसंद ना आया,और फ़रमाया ये तो यहूदीयों का तरीक़ा है,रावी कहते हैं चुनांचे रसूल करीम सलल्लाहु अलैहि के सामने नाक़ूस का ज़िक्र हुआ,तो नबी करीम सलल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया ये तो ईसाईयों का तरीक़ा है.

चुनांचे अबद अल्लाह बिन जै़द बिन अबद रुबा वहां से निकले तो उन्हें नबी करीम सलल्लाहु अलैहि वसल्लम के इसी मुआमला की फ़िक्र खाए जा रही थी और वो इसी सोच में ग़र्क़ थे,चुनांचे उन्हें ख़ाब में अज़ान दिखाई गई,रावी कहते हैं जब वो सुबह रसूल करीम सलल्लाहु वसल्लम के पास आए तो उन्हें अपनी ख़ाब बयान करते हुए कहने लगे,मैं अपनी नींद और बेदारी की दरमयान वाली हालत में था कि एक शख़्स आया और मुझे अज़ान सिखाई.

रावी कहते हैं इस से क़बल उम्र रज़ी अल्लाहु ताला अन्हु भी ये ख़ाब देख चुके थे,लेकिन उन्होंने उसे बीस रोज़ तक छुपाए रखा और बयान ना किया.
रावी कहते हैं फिर उन्होंने भी रसूल करीम सलल्लाहु अलैहि वसल्लम को अपनी ख़ाब बयान की तो रसूल करीम सल्लाहु अलैहि वसल्लम फ़रमाने लगे.तुम्हें ख़ाब बयान करने से किस चीज़ ने मना किया था ? तो उन्हों ने जवाब दिया अबद.

उसके बाद रसूल करीम सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया बिलाल उट्ठो और देखो तुम्हें जै़द क्या कहते हैं तुम भी इसी तरह करो, चुनांचे बिलाल रज़ी अल्लाहु अन्हु ने अज़ान कही सुनाईअब्बू दाउद हदीस नंबर ( 420 )

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