अकड़ छोड़ अमित शाह झुक गये लेकिन फिर भी नही बनी बात,गठबंधन के लिए तैयार नही ये दल

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अमित शाह

अगामी लोकसभा चुनाव का शंखनाद होने को है.सभी राजनीतिक पार्टियों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं.गठबंधन और दल-बदल की राजनीति शुरू है.सभी पार्टियां हर हाल में अपनी स्थित मजबूत करने में जुटी हैं.भाजपा कोशिश में है अपने सहयोगी दलों को एकजुट रखे इसी मद्देनजर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को फोन कर गठबंधन की बात की.लेकिन शिवसेना प्रमुख ने इतनी बड़ी शर्त रख दी कि भाजपा को बड़ा झटका लग सकता है.अमित शाह के झुकने के बाद भी उद्दव ठाकरे नही माने.

अमित शाह ने किया फोन
दरअसल,चुनाव से पहले भाजपा सभी सहयोगी दल से अच्छी तरह से तालमेल बिठाना चाहती है.पार्टी हर राज्य में जल्द से जल्द सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय कर लेना चाहती है.इसे लेकर अमित शाह ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को फोन लगाया और लोकसभा सीटों के बंटवारे पर बात की.

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक,इस दौरान शिवसेना प्रमुख ने अमित शाह के सामने 1995 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान हुए फॉर्मूले के तहत सीट बंटवारे की शर्त रख दी.शिवसेना एक पैकेज के रूप में लोकसभा के अलावा महाराष्ट्र विधानसभा की सीटों पर भी बात स्पष्ट करना चाहती है.ऐसा माना जा रहा है कि महाराष्ट्र में अभी भी भाजपा और शिवसेना के गठबंधन को लेकर संशय बना हुआ है.

शिवसेना ने रख दी बड़ी शर्त
यहां आपको बता दें कि 1995 में 288 विधानसभा सीट में से शिवसेना 169 और भाजपा 116 सीटों पर चुनाव लड़ी थीं.तब दोनों पार्टियों ने मिलकर 138 सीटें प्रदेश में जीत पाई थीं.इसमें शिवसेना के खाते में 73 और भाजपा के खाते में 65 सीटें आई थीं.

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हाल ही में शिवसेना ने साफ कहा था कि महाराष्ट्र में वह बड़ा भाई है और हमेशा रहेगा.अब देखना यह है कि इस शर्त के बाद भाजपा क्या कदम उठाती है.लेकिन,इस फोन कॉल के बाद महाराष्ट्र का मुकाबला दिलचस्प हो गया है.

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