लोकसभा चुनाव:महाराष्ट्र में ताकत बन गयी AIMIM,अगर कांग्रेस-NCP करे गठबंधन तो इतनी सीट जीत सकती है

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महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना के सामने एनसीपी और कांग्रेस का गठबंधन टिक नही पाया,एनसीपी जहाँ राज्य में चार लोकसभा सीट जीत सकी वही कांग्रेस पार्टी मात्र एक सीट ही जीत पाई.भाजपा को 23 सीट पर सफलता मिली है वही उसकी सहयोगी शिवसेना ने 18सीट जीती है लेकिन आश्चर्यजनक रूप से राज्य में ओवैसी की AIMIM ने औरंगाबाद सीट जीत ली वही एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार जीतने में सफल रहा है.

असदुद्दीन ओवैसी ने वंचित बहुजन आघाड़ी से गठबंधन किया था जिस उन्हें महाराष्ट्र के औरंगाबाद सीट में फायदा मिला,पार्टी ने औरंगाबाद में दलित मुस्लिम मतों के बल पर चौकाने वाली जीत दर्ज कर दी.हलाकि वंचित बहुजन आघाडी ने 47 सीटो पर अपने प्रत्याशी उतारे लेकिन कहीं जीत उसे नही मिली लेकिन आश्चर्यजनक रूप से वंचित बहुजन आघाडी को पुरे राज्य में चालीस लाख से अधिक मत मिले.

ओवैसी

बन गया थर्ड फ्रंट-पिछले एक साल से ठीक चुनाव के समय वंचित बहुजन आघाड़ी राज्य में तीसरा फ्रंट बन गया है.वंचित बहुजन आघाड़ी की सभाओं में भारी भीड़ को देखते हुए इस चुनाव में वंचित आघाड़ी के उम्मीदवारों को कितना वोट मिलता है इस पर सभी की निगाहें थी.

आघाड़ी ने राज्य भर में 40 लाख वोट लेकर तीसरे पर्याय के रूप में खुद को सिद्ध जरूर किया है,हलाकि नागपुर में पार्टी को उम्मीद से कम सफलता मिली.वही सोलापुर में पार्टी के मुखिया को इतने मत मिले जोकि कांग्रेस और भाजपा के जीत के अंतर से कही ज्यादा थे.अकोला में तो प्रकाश आंबेडकर ने ही भाजपा को चुनौती दी है.नांदेड में वंचित आघाडी के वज़ह से कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक चौहाण को हार का सामना करना पड़ा.

यदि कांग्रेस-एनसीपी वंचित आघाडी और AIMIM से गठबंधन कर लिया होता तो चार लोकसभा सीट्स पर नतीजे बदल जाते.जो नतीजे आये उससे ये बात साफ़ है राज्य में करीब सत्तर विधानसभा ऐसी है जहाँ इस गठबंधन का प्रभाव दिखाई दिया यदि एनसीपी और कांग्रेस ने वंचित आघाडी से गठबंधन नही किया फिर विधानसभा चुनावों में भी कांग्रेस-एनसीपी का सफाया हो सकता है.

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