अगर आप पानी पीकर गिलास में थोड़ा छोड़ देते है फिर प्यारे नबी (स.अ.व.) का फरमान ज़रूर सुने

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हर जानदार को पानी पिलाने पर सवाब है।पानी के ज़रीये हर चीज़ की हयात है।जैसा कि अल्लाह ताला का फ़रमान है,तर्जुमा:और हमने हर जानदार चीज़ पानी से बनाई तो क्या वो ईमान लाएँगे।(सूरा-ए-अनबया) इस्लाम ऐसा पाकीज़ा मज़हब है जहां कुत्ते को पानी पिलाने पर जन्नत में जाने की खुशखबरी सुनाई गई है,और वज़ू अरु गुसल में ज़्यादा पानी ख़र्च करने पर मह्शर में बारगाह-ए-समदीयत में जवाबदेही का तसव्वुर मौजूद है।

अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पानी का ज़िक्र बार बार किया है,वहीं कुरान में भी पानी का ज़िक्र 58 बार आया है।पानी को बचाने के लिए भी हदीस में ज़िक्र किया गया है,और कहा गया है कि पानी का कम इस्तेमाल किया करो,और पानी बचाया करो।दोस्तों मुस्लमानों को पूरी दुनिया में पानी की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है.

क्योंकि हमारे दीन का अहम रुकन नमाज़ पानी के बग़ैर मुम्किन नहीं वुज़ू,ग़ुस्ल-ए-तहारत-ओ-पाकीज़गी सिर्फ पानी से ही है।इस लिए पानी को खराब होने और उसे बर्बाद होने से बचाएं।वहीं अगर किसी के पास ज़रूरत भर का पानी न हो तो उसे दे भी दिया जाये।अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम से दरयाफ़त किया गया ऐसी कौन सी चीज़ है कि जिससे इन्सानों को मना नहीं किया जा सकता?तो आपने फ़रमाया वो चीज़ पानी है।(बुख़ारी, हदीस नंबर३४७७)

एक मर्तबा अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि तीन चीज़ें ऐसी हैं जो सब के लिए आम हैं।एक पानी दूसरी घास तीसरी हवा।(अब्बू दाऊद,हदीस नंबर ३४७७)पानी गंदा करना,ख़राब करना और नापाक करने के बारे में हमें अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सख़्ती से मना फ़रमाया है।

अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया है कि तुम में से कोई शख़्स बहते हुए पानी में पेशाब-ओ-पाख़ाना ना करे,पानी ज़रूरत से ज़्यादा बेचने की आपने मुमानअत फ़रमाई कि दौलतमंद है वो ज़्यादा ख़रीद ले और ग़रीब ना ख़रीद सके।सख़्त ज़रूरत के तहत ही बेचा जाये।अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम ख़ुद पानी का इस्तिमाल निहायत किफ़ायत-शिआरी से किया करते थे।

अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम एक मर्तबा नहर के किनारे वुज़ू फ़र्मा रहे हैं,आप बर्तन में अलग पानी लेते हैं,इस से वुज़ू करते हैं ओ वुजू का पानी बच जाता है,इस को दुबारा नहर में डाल देते हैं।दोस्तों पहले जमाने में लोग कुंवा से पानी निकालते थे,और पानी बहुत कम इस्तेमाल करते थे, लेकिन दोस्तों आज के जमाने में शहरों में मोटर लगे हुए हैं,गाव में नल लगा होता है.

लोग मोटर चला कर भूल जाते हैं,और पानी बहता रहता है,इस तरह हरगिज़ नहीं करनी चाहिए,बल्कि पानी को हर हाल में बचा कर रखना चाहिए, किसी भी सूरत में पानी को खराब न करें,उसे बर्बाद करें।पानी के बारे में क़ुरआन-ओ-अहादीस में बहुत से अहकाम मौजूद हैं।पानी के इस्तिमाल और एहतियात के बारे में जो अक़्वाल पाए जाते हैं.

और जो तदबीरें-ओ-तरीक़े बताए गए हैं इस पर अमल की ज़रूरत है।जो चीज़ क़ीमती होती है इस की इज़्ज़त-ओ-तौक़ीर भी करनी होती है।नेअमतों की इज़्ज़त ना करना नेअमतों के ज़वाल का सबब बनता है।अल्लाह हम सब को पानी की एहमीयत समझने और इस की बूँद बूँद की हिफ़ाज़त की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।आमीन,सुम्मा आमीन।

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