83 पूर्व सरकारी अधिकारियों ने माँगा CM योगी से इस्तीफ़ा..

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फ़ोटो क्रेडिट- इन्टरनेट)

उत्तर प्रदेश: लोकतंत्र मे सत्ता पक्ष की विफलताओं को उजागर करना विपक्ष का काम होता है। इस कड़ी मे संबंधित मंत्री से त्यागपत्र मांगना भी एक समान्य प्रक्रिया है। लेकिन ऐसा बहुत कम होता है जब ब्यूरोक्रेट्स( विभिन्न पदो पर नियुक्त सरकारी अधिकारी ) किसी राज्य के मुख्यमंत्री से त्याग पत्र मांगें। लेकिन ऐसा हुआ है, और यह हुआ है उत्तर प्रदेश मे। जहाँ बुलंदशहर हिंसा के दौरान इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की हत्या से क्षुब्ध कई पूर्व नौकरशाहों ने एक खुला पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने राज्य के हालात पर अपनी चिंता व्यक्त की है। साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के त्याग पत्र की मांग भी की.

पत्र में जो मुख्य बातें लिखी है उसके अनुसार 3 दिसंबर 2018 को हुई हिंसक घटना के दौरान पुलिस अधिकारी की हत्या राजनीतिक द्वेष के कारण हुई है। यह एक बेहद खतरनाक संकेत है। इससे पता चलता है कि उत्तर प्रदेश में शासन प्रणाली के मौलिक सिद्धांतों, संवैधानिक नीति और मानवीय सामाजिक व्यवहार का ढांचा नष्ट हो चुका हैं। राज्य के मुख्यमंत्री एक पुजारी की तरह धर्मांधता और बहुसंख्यकों के प्रभुत्व के एजेंडे पर काम कर रहे हैं।पत्र में आगे लिखा है कि सांप्रदायिक तनाव पैदा करने के लिये ऐसे हालात पहली बार उत्पन्न नहीं किए गए और न ही ऐसा पहली बार हुआ है कि जब भीड़ द्वारा एक पुलिसकर्मी हत्या की गई हो। यह गौरक्षा के नाम पर मुसलमानों को अलग-थलग कर सामाजिक विभाजन पैदा करने की राजनीति का पहला मामला भी नहीं है। पूर्व अधिकारियों के समूह ने एक गंभीर स्थिति मानते हुए और सहन नहीं करने की बात की है।। साथ ही सभी नागरिकों से नफरत की राजनीति और विभाजन के खिलाफ एकजुट होने की अपील की है।

पत्र मे इलाहाबाद उच्च न्यायालय से इस घटना का संज्ञान लेते हुए न्यायिक जांच करवाने की अपील भी की गई है। साथ ही मुसलमानों, महिलाओं, आदिवासियों तथा दलितों के खिलाफ हिंसा को रोकने के लिये जन-आंदोलन चलाने की भी अपील की गई है। इसके अलावा पत्र में राजनीतिक दबाव की परवाह किए बगैर संवैधानिक मूल्यों के लिए खड़े होने वाले सुबोध कुमार की बहादुरी को सलाम करने की अपील भी की गई है। यह खुला पत्र जारी करने वालों में पूर्व विदेश सचिव श्याम सरन, पूर्व विदेश सचिव सुजाता हिंसा, योजना आयोग के पूर्व सचिव एन सी सक्सेना, अरुणा रॉय, रोमानिया में भारत के पूर्व राजदूत जूलियो रिबेरो, प्रशासकीय सुधार आयोग, उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व अध्यक्ष जे एल बजाज, दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग और पूर्व आईएएस अधिकारी हर्ष मंदेर सहित कुल 83 पूर्व नौकरशाह शामिल हैं।

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