भ्रष्टाचार के बाद फोर्ब्स के संपादक ने कहा नोटबंदी लोगों की संपत्ति में भारी लूट थी

भ्रष्टाचार के बाद फोर्ब्स के संपादक ने कहा नोटबंदी लोगों की संपत्ति में भारी लूट थी

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नोटबंदी के दस महीने पूरे हो जाने के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था की धीमी चाल पर मोदी सरकार को घेरते हुए फोर्ब्स पत्रिका के चीफ इन एडिटर स्टीव फोर्ब्स ने कहा कि नोटबंदी लोगों की संपत्ति की भारी लूट थी।
पिछले साल नवंबर में सरकार ने नोटबंदी लागू की थी। जिसकी आलोचना यूं तो अभी तक केवल विपक्षी पार्टियां करती थी, लेकिन यह पहली बार है कि मोदी सरकार की इस योजना पर अबकी बार हमला बाहर से हुआ है।

फोर्ब्स के संपादक ने लिखा कि, लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार द्वार उठाया यह कदम काफी चौंकाने वाला था, यह लोगों की संपत्ति की भारी लूट थी। जिसने भारत की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से प्रभावित किया है। बता दें कि नोटबंदी के बाद विकास दर में लगातार गिरावट आ रही है।

स्टीव फोर्ब्स ने भारतीय नौकरशाही की आलोचना करते हुए कहा कि भारत में भ्रष्टाचार, लाल फीता शाही और सुस्ती व्याप्त है।

उन्होंने मोदी सरकार की नोटबंदी की तुलना साल 1970 में इंदिरा गांधी द्वारा लागू नसबंदी से की। साथ ही उन्होंने इस प्रकार की योजनाओं को सरकार में नैतिकता की कमी को बताया और इन योजनाओं की तुलना नाजी द्वारा चलाए दमन चक्र से की।

भारत में कारोबारियों की खराब हालात और घट रहे रोजगार के लिए भी फोर्ब्स ने मोदी सरकार को कठघरे में खड़े किया। साथ ही कहा कि कैरेंसी बदले ने भ्रष्टाचार और आतंकवाद से लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती है।

सरकार के नोटबंदी पर आलोचना करने के साथ जीएसटी पर सरकार की तारीफ करते हुए फोर्ब्स के संपादक ने लिखा कि भारत को अपने जटिल कर प्रणाली से बाहर निकलना होगा, जो कर चोरी को बढ़ावा देती है। भारत को कर ढ़ाचे को सरल करने के साथ-साथ, व्यापार और अन्य करों की दर को कम करना चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में सरकारों और अर्थशास्त्रियों को बीज में एंटी कैश का सबसे घातक उदाहरण पेश किया है।

उन्होंने कहा कि भारत ने अनैतिक रूप से अपने लोगों को नुकसान पहुंचाने के साथ, दुनिया के सामने भी एक खराब उदाहरण पेश किया है।

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