होमी जे भाभा, परमाणु वैज्ञानिक (फ़ाइल)

होमी जे भाभा, परमाणु वैज्ञानिक (फ़ाइल)

जन्म-दिन विशेष: जहांगीर भाभा की वजह से भारत हुआ परमाणु संपन्न देश

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होमी जहांगीर भाभा का जन्म 30 अक्टूबर 1909 को मुंबई (बॉम्बे) में हुआ. वो भारत के सबसे मशहूर वैज्ञानिकों में से एक थे. उन्हें ‘आर्किटेक्ट ऑफ इंडियन एटॉमिक एनर्जी प्रोग्राम’ भी कहा जाता है.

उन्होंने उस दौर में नाभिकीय ऊर्जा अनुसंधान प्रारम्भ किया जब बहुत कम लोग इसकी कल्पना कर पा रहे थे. विकिपीडिया पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक़-

 

होमी जहांगीर भाभा

होमी जहांगीर भाभा

भाभा का जन्म मुम्बई के एक पारसी परिवार में हुआ था. वो पूरे दुनिया में अपनी क़ाबिलियत की वजह से मशहूर थे.उन्होंने मुंबई से कैथड्रल और जॉन केनन स्कूल से पढ़ाई की उसके बाद वो एल्फिस्टन कॉलेज मुंबई और रोयाल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस गए जहां उन्होंने बीएससी की पढ़ाई की.

इसके बाद वो 1927 में इंग्लैंड के कैअस कॉलेज,कैंब्रिज में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने गए. कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय सी ही उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि मिली. बताया जाता है कि उनका भौतिकी विज्ञान के प्रति विशेष लगाव था और कैंब्रिज से एक बार उन्होंने पत्र लिख कर बताया था कि भौतिकी ही उनका अंतिम लक्ष्य है.

भारत वापस आने के बाद उन्होंने अपने अनुसंधान को आगे बढ़ाया और भारत को परमाणु शक्ति बनाने के मिशन में दिल ओ जान से जुट गए. उन्होंने पहले क़दम के तौर पर 1945 में मूलभूत विज्ञान में उत्कृष्टता के केंद्र टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (टीआइएफआर) की स्थापना की.

गौर करने की बात है कि जब देश आज़ाद हुआ तो भाभा ने दुनिया भर में काम कर रहे भारतीय वैज्ञानिकों से अपील की कि वे भारत लौट आएं और यहाँ आकर देश को विज्ञान समर्द्ध बनाएं.
उनकी इस अपील का बहुत अच्छा असर हुआ और कई वैज्ञानिक भारत लौट आये.इन्हीं में एक थे मैनचेस्टर की इंपीरियल कैमिकल कंपनी में काम करने वाले होमी नौशेरवांजी सेठना.
विकिपीडिया में दी गयी जानकारी के मुताबिक़ अमेरिका की मिशिगन यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले सेठना में भाभा को काफी संभावनाएं दिखाई दी. ये दोनों ही वैज्ञानिक भारत को परमाणु शक्ति संपन्न बनाने के अपने कार्यक्रम में जुट गए.
यह कार्यक्रम मूल रूप से डॉ. भाभा की ही देन था, लेकिन यह सेठना ही थे, जिनकी वजह से डॉ. भाभा के निधन के बावजूद न तो यह कार्यक्रम रुका और न ही इसमें कोई बाधा आई.

उनकी इसी लगन का नतीजा है कि 1974 में भारत शांतिप्रिय परमाणु विस्फोट कर पाया. ये भाभा की ही देन है कि आज भारत एक परमाणु शक्ति के तौर पर जाना जाता है.

1954 में उन्हें पदम् भूषण से सम्मानित किया गया. 1942 में उन्हें एडम’स पुरूस्कार से सम्मानित किया गया.

24 जनवरी सन 1966 को एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया था.

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