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चाहे लहर किसी की हो -इस सीट से मुख्तार अंसारी को ही मिलती है जीत ,ये है वज़ह

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मऊ सदर विधानसभा जिसका नाम सुनते ही बहुबली मुख्तार अंसारी का ही नाम दिलो दिमाग में आ जाता है ये वो विधानसभा सीट है जहाँ अंसारी की लहर चलती है 2007 में पुरे प्रदेश में मायावती की लहर थी लेकिन निर्दलीय ही मुख़्तार अंसारी इस सीट से रिकॉर्ड मतों से जीत गये पिछले विधानसभा चुनाव में भी यहाँ सपा नही जीत सकी और मुख़्तार अंसारी त्रिकोणीय मुकाबले में जीत गये.


मऊ सदर विधानसभा सीट के आंकड़े
-यहाँ पर सबसे ज्यादा मुस्लिम वोटर है 1,45,340 मुस्लिम वोटर इस सीट पर है,वही दलित वोटर- 1,10,247 है ,यादव मतदाता भी यहाँ 40,212 है वही ठाकुर वोटर चालीस हजार है ,ब्राह्मण करीब बीस हजार है

जीतने की है ये वज़ह

-मुख़्तार अंसारी का मुस्लिम वोटो में ज़बरदस्त पकड़ है हर चुनाव में उन्हें मुस्लिम के 60 से 70 परसेंट वोट मिलता है

-इस सीट पर दलित वोटर काफी अधिक है लेकिन बसपा यहाँ पर एकमुश्त दलित वोट नही पाती है मुख़्तार अंसारी के पास भी दलित वोटर एक तबका है
जोकि मुख़्तार के लिए वरदान है भूमिहारो के खिलाफ दलित उत्पीडन के खिलाफ आवाज़ उठाने के कारण अंसारी ने दलितों में पैठ बना रखी है.

-यहाँ पर सपा कमज़ोर है क्युकि पार्टी के पास यादव वोटर ही है लेकिन कोई मुस्लिम नेता नही मिल सका जोकि मुख़्तार को टक्कर दे पाए सपा यहाँ तभी जीत जब मुख्तार ने सपा में रहे.

-बीजेपी को मतदान करने वाले सवर्ण वोटर इस सीट पर बस सत्तर हजार ही है सबसे बड़ी बात है यहाँ पर कभी भी हिन्दू वोटो का धुर्विकरण नही हो सका,यहाँ तक कि मऊ में दंगा होने पर भी विधानसभा चुनावों में भाजपा मुकाबले से बाहर रही.

इस बार क्या होगा

-बसपा को उम्मीद है दलित मतदाता इस बार एकमुश्त पार्टी को मतदान करेंगे और अगर पार्टी ने मुस्लिम मतो के उस हिस्से को पा लिया जोकि मुख्तार के खिलाफ मतदान करते है तब पासा पलट जायेगा .

-बीजेपी के पास इस सीट पर पाने को कुछ नही है अगर मुकाबले में आ जाए तो भी बीजेपी के लिए बड़ी बात होगी .

-इस बार मुख्तार सपा में है उनके बेटे को इस सीट पर सपा का मुलायम खेमा लड़ा सकता है इसलिए यहाँ पर यादव मतदाता मुख्तार के लिए प्लस होंगे अगर मुख्तार दलित का अपना परम्परागत वोट पा लेते है तब अंसारी परिवार का यहाँ से जीतना फिर सुनिश्चित हो जायेगा

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