सरकार के ज़बरदस्त दबाव के बाद भी इस रिपोर्टर ने नही बदली TV रिपोर्टिंग

सरकार के ज़बरदस्त दबाव के बाद भी इस रिपोर्टर ने नही बदली TV रिपोर्टिंग

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पंजाब-अमूमन स्थानीय रिपोर्टर सरकार के दबाव में मज़बूरन झुक जाते हैं लेकिन एबीपी के पंजाब एवं हरियाणा के ब्यूरो प्रमुख जगविंदर  पटियाल ने शानदार रिपोर्टिंग कर बाबा राम रहीम और हरियाणा सरकार का वो चेहरा बेनकाब किया जिसकी हिम्मत दिल्ली के बड़े बड़े पत्रकार नहीं कर पाए. गोलीबारी  और आगजनी के बीच पटियाल ने जान हथेली पर रखकर जिस तरह  बाबा रहीम काण्ड में फैसले की रिपोर्टिंग की उससे हरियाणा के मुख्यमंत्री क्या प्रधानमंत्री तक हिल गए. फैसले के खून खराबे वाले दिन पटियाल देश की आवाज़ बनकर सारी साज़िश का खुलासा कर रहे थे.

पटियाल के  तेवर इतने तीखे थे कि सूचना एवं प्रसारण  मंत्रालय को  कई न्यूज चैनल्स को फोन कर स्पॉट रिपोर्टिंग  “डाइल्यूट करने का आग्रह करना पड़ गया. सड़क पर हो रही हिंसा की  लाइव तस्वीरें कहीं जनता में भय ना पैदा कर दें इसलिए न्यूज़ चैनलों ने  बात मानते हुए  शाम छह बजे  के बाद मौके से रिपोर्टिंग को धीरे धीरे  कम दिखाना शुरू किया. लेकिन अगले दिन, पटियाल फिर सारे तेवर के साथ स्क्रीन पर दिखे और उन्होंने लचर व्यवस्था की फिर बेधड़क पोल खोलनी शुरू की.
सोमवार को सज़ा सुनाए जाने के दिन पटियाल फिर गरजे. उन्होंने खुलासा किया कि बाबा की जीप से मशीनगन  बरामद हुई है. सिरसा के डेरा में माउज़र पिस्तौल से लेकर एके राइफल जैसे हथियारों का अंबार लगा है. पटियाल  ने  एक्टिविस्ट रिपोर्टर की तरह बाबा के हर घिनौने धतकरम  और उसके बड़े नेताओं  के साथ साठगांठ का टीवी परदे पर सजीव पर्दाफाश  किया. इस घटना पर पटियाल की रिपोर्टिंग ने सबको ढेर किया है. चाहे एबीपी के ही कुछ भारी भारी  भरकम धर्मनिरपेक्ष एंकर हों, ज़ी न्यूज़ के राष्ट्रवादी शेर  या आज तक के क्रांतिकारी एंकर हो, सब के सब बौने लगने लगे. सच तो ये है कि पटियाल इतनी बहादुरी उस वक़्त दिखा रहे थे जब उन्हें डेरे के हथियार बंद गुंडे और बाबा के कुछ माफिया टाइप चेले धमकियाँ दे रहे थे.

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