शहीद उधम सिंह के परपोते, बेरोज़गारी का शिकार,दिहाड़ी मजदूरी करने को मजबूर है

शहीद उधम सिंह के परपोते, बेरोज़गारी का शिकार,दिहाड़ी मजदूरी करने को मजबूर है

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शहीद उधम सिंह के परपोते को नौकरी हासिल करने के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।जग्गा सिंह इस समय अपने परिवार के छह सदस्यों के साथ बेहद ग़रीबी में जीवन गुज़ार रहे हैं।

शहीद उधम सिंह के परपौत्र को विषम आर्थिक परिस्थितियों में अपने 60 वर्षीय पिता जीत सिंह की देखभाल भी करनी पड़ रही है जो एक दिहाड़ी मज़दूर हैं।30 वर्षीय जग्गा सिंह दसवीं तक पढ़े हैं और बहुत ही कम वेतन पर संगूर की एक कपड़ा दुकान में काम करते हैं। दुकान की आय से उनके लिए घर चलाना लगभग असंभव है।

शहीद उधम सिंह के परपोते जग्गा सिंह पंजाब सरकार में नौकरी पाने के लिए वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं। 10 साल पहले उन्हें नौकरी देने का वादा किया गया था जो अबतक पूरा नहीं हुआ है।

जग्गा सिंह इस आशा से अपना विरोध दर्ज कराने के लिए दिल्ली के जंतर-मंतर तक गए कि शायद राष्ट्रीय राजधानी में सत्ता के गलियारों में उनकी आवाज़ सुन ली जाएगी।

उल्लेखनीय है कि 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर में जलियांवाला बाग की एतिहासिक रक्तरंजित घटना घटी थी। उस समय शहीद उधम सिंह भी वहां पर उपस्थित थे।

इस दर्दनाक घटना के लगभग 21 साल बाद उधम सिंह ने लंदन में माइकल ओ-डायर की हत्या करके जलियांवाला बाग के नरसंहार का बदला लिया था। जलियांवाला बाग में कत्लेआम के समय माइकल ओ-डायर ही पंजाब का गवर्नर था।

बाद में उधम सिंह को हत्या के आरोप में लंदन में फांसी दे दी गई थी। उन्हीं शहीद भगत सिंह के परपौत्र आज सरकारी नौकरी के लिए दर-दर भटक रहे हैं।

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