खुले में शौच करने पर कार्रवाई करने वाले अफ़सर से कोर्ट ने पूछा और कोई काम नहीं बचा क्‍या

खुले में शौच करने पर कार्रवाई करने वाले अफ़सर से कोर्ट ने पूछा और कोई काम नहीं बचा क्‍या

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हरियाणा-चार लोगों को अपराधी की तरह पकड़कर उनकी फोटो फेसबुक पर डाली थी. उनका 11-11 सौ रुपये का चालान भी किया था.

अपने बहरेपन को मात देकर तीन बार आईएएस की परीक्षा पास करने वाले एक होनहार आईएएस अधिकारी मणिराम शर्मा ओडीएफ खुले में शौच मुक्‍त अभियान को लेकर विवादों में घिर गए हैं.

हरियाणा के सबसे पिछड़े और मुस्‍लिम बहुल जिले मेवात (नूंह) के तत्कालीन जिला उपायुक्‍त मणिराम शर्मा पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने शिकंजा कस दिया है. ओडीएफ यानी खुले में शौच मुक्‍त अभियान के नाम पर उन्‍होंने जून में कुछ लोगों को पकड़कर उनकी फोटो अपने फेसबुक पर डाली थी और बहुत आपत्‍तिजनक भाषा का इस्‍तेमाल किया था. उनका 11-11 सौ रुपये का चालान भी किया था.इस मामले पर डाली गई याचिका पर हार्इकोर्ट ने नोटिस जारी कर शर्मा से जवाब मांगा है. वह इस वक्‍त पलवल जिले के उपायुक्‍त हैं. कोर्ट ने पूछा है कि क्‍या डीसी के पास रेवेन्‍यू और अन्‍य प्रशासनिक कोई काम नहीं बचा जो वे यह ड्यूटी दे रहे हैं.

अदालत ने शर्मा को फटकार लगाते हुए सरकार को आदेश दिए हैैं कि उनके कार्यकाल के दौरान जिले के विभागों में किए गए कार्यों का लेखा-जोखा दिया जाए. मामले की अगली सुनवाई 28 सितम्बर को होगी. इस बारे में शर्मा से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उनकी कोई टिप्‍पणी नहीं मिली.
याचिका कर्ता के वकील डॉ० मज्लिश खान व उनके सहायक सरफराज अंजुम मोर ने बताया कि मेवात के तत्कालीन उपयुक्त मणिराम शर्मा ने खुले में शौच करने वालों को गिरफ्तार कराया और उन्‍हें बैठाकर अपराधी की तरह दिखाया. जिसकी वजह से आम लोगों और उनके रिश्तेदारों की नजरों में उनकी बदनामी हुई. फेसबुक पर उनकी मान-मर्यादा को ठेस पहुंची.
अपनी फेसबुक पोस्‍ट में डीएम ने क्‍या कहा था
सालाहेडी और सलम्बा खुले में शौच के लिए दो सर्वाधिक बदनाम गांव. दोनों गांव में बड़े-बड़े लोग. उनसे ज्यादा संख्या में बड़े-बड़े लोगों के चमचे इस चमचागिरी की ताकत के दम पर ही न ये सरपंच की सुनते हैं और न जिला प्रशासन की.

आज इनकी अकड़ ढीली करनी थी और तसल्ली से ढीली कर भी दी. फोटो में दिखने वाले व्यक्ति न केवल सम्पन्न और पहुंच रखने वाले हैं बल्कि इनके घरों में शौचालय भी है. फिर भी चमचागिरी की ताकत का भरोसा कुछ ज्यादा ही था इनको. इनको न केवल विभिन्न धाराओं में गिरफ्तार किया गया और फिर पंचायत खाते में जुर्माना भी वसूल किया गया. न नेतागिरी काम आई और न चमचागिरी.
एक तरफ कहते है कि खुले में शौच करने वालों का न रोजा कबूल होता है और न नमाज…और दूसरी तरफ पाक रमजान में यह हरकत नाकाबिले बर्दाश्त तो है ही’.
कल दो गांवों में और जाना है. इन गांवों के मर्दों को भी अपनी नेतागिरी और चमचागिरी पर कुछ ज्यादा ही भरोसा है. जाहिर सी बात है कि फोर्स भी इसी हिसाब से धावा बोलेगी.’
इस कार्रवाई पर जब मेवात के लोगों ने गुस्सा जाहिर करना शुरू किया तो मणिराम शर्मा ने और आपत्तिजनक पोस्ट डाली और कहा कि मुझे अपनी गाली वाली भाषा से बहुत प्यार है
‘कुछ लोगों को मेरी भाषा-शैली पर आपत्ति है. संख्या ज्यादा ही है. आपत्ति करने वालों ने मेरी भाषा अभी सुनी ही कहां है मेरी भाषा जिसमें दस शब्दों वाले वाक्य में आठ शब्द गाली ही होते हैं, वही मेरी ओरिजनल भाषा है. और मुझे अपनी भाषा से बहुत प्यार है.
बाकी लोगों को मेरे आईएएस होने में संदेह है या अफसोस है मुझे स्वयं भारी संदेह है अपने आईएएस होने पर. इसीलिए आज तक कोई विजिटिंग कार्ड या आइडेंटिटी कार्ड नहीं छपवाया. कभी अपना परिचय आईएएस के रूप में नहीं दिया.
जिला उपायुक्त की इस भाषा पर लोग हुए थे हैरान

शर्मा यहीं नहीं रुके थे. कहा था कि ‘इसीलिए आपत्ति करने वालों से मेरी सहमति है,सहानुभूति है. एक मित्रवत सलाह भी आप लोगों को जाकर यूपीएससी में शिकायत अवश्य करनी चाहिए जिन्होंने एक बार नहीं, दो बार नहीं, बल्कि तीन बार मुझे आईएएस में सिलेक्ट कर लिया और वह भी बिना किसी रिजर्वेशन के. बिना ट्यूशन, बिना किसी कोचिंग के.
फ़ेसबुकिया बहादुर यूपीएससी को क्यों नहीं बताते कि इस बहरे-गंवार की तुलना में मेवात में टेलेन्ट भरा पड़ा है. साफ-सुथरी भाषा वाला टेलेन्ट. एक बार यूपीएससी को पता चल जाए, बस फिर मेरे जैसा गंवार तो गया काम से.छुट्टी पक्क भविष्य में भी यूपीएससी मेरे जैसे गंवार से सावधान रहेगी. आप जैसे निपुण भाषाविदों को लाल कालीन बिछाकर बुला लेगी 

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