तेजस्वी की नीतीश को चेतावनी:दवाब में राजनीति नही करूँगा,हार-जीत से बड़ी है विचारधारा

तेजस्वी की नीतीश को चेतावनी:दवाब में राजनीति नही करूँगा,हार-जीत से बड़ी है विचारधारा

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पटना-राष्ट्रपति चुनाव को लेकर जनता दल यूनाइटेड और राष्ट्रिय जनता दल में तल्खी बढती जा रही है,बिहार के उपमुख्यमंत्री ने भी सीएम नीतीश कुमार को चेतावानी दी है,उन्होंने कहा है कि किसी के दवाब में राजनीति उनकी पार्टी नही करेगी.तेजस्वी ने कहा कि मैदान में उतरने से पहले हार जीत का आकलन कैसे किया जा सकता है.तेजस्वी ने कहा कि हार जीत से बड़ी है विचारधारा.

बता दे ये पहली बार हुआ है कि तेजस्वी ने नीतीश पर कोई हमला बोला है,तेजस्वी ने संकेत दिया है सरकार चलाने के नाम पर दवाब की राजनीति उनकी पार्टी नही करने वाली है.सूत्रों की माने तो आरजेडी के कई नेताओं का कहना है कि उपमुख्यमंत्री का मैसेज यह बताता है कि वह सीएम नीतीश से डरने वाले नहीं है अगर यही हाल रहा फिर बड़ा कदम उठा सकते हैं.

तेजस्वी के बयान को लेकर जेडीयू नेता वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा है कि उपमुख्यमंत्री का बयान परेशान करने वाला है. सिंह ने कहा कि जेडीयू को कोई डिक्टेट नहीं कर सकता.दूसरों को नसीहत देने से बेहतर है कि आरजेडी महागठबंधन धर्म निभाए.वही, आरजेडी नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा कि कोविंद का समर्थन करने का नीतीश कुमार का फैसला राष्ट्रव्यापी महागठबंधन बनाने की कोशिश को झटका है.बीजेपी को रोकने के लिए हम जेडीयू को बर्दाश्त कर रहे हैं.

वही रजद नेताओ के बयान पर जेडीयू नेता वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि यह बयान गठबंधन की गरिमा का स्पष्ट उल्लंघन है.उन्होंने लालू प्रसाद से ऐसे नेताओं को काबू करने को कहा है.बता दें कि 2 जुलाई को जेडीयू कार्यकारिणी की बैठक होनी है, ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि सीएम नीतीश कुमार महागबंधन को लेकर बड़ा फैसला ले सकते हैं.

23 जून को लालू प्रसाद यादव की इफ्तार पार्टी में सीएम नीतीश कुमार ने जब शिरकत की थी, तो दोनों के बीच तनाव साफ नजर आ रहा था.लालू और नीतीश एक दूसरे से नजरें चुराते हुए नजर आये.दोनों के बॉर्डी लैग्वेज को देखकर साफ पता चल रहा था कि महागठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं है.इफ्तार पार्टी के बाद नीतीश के बयान ने इस बात को और हवा दे दी.नीतीश ने कहा था कि बिहार की बेटी मीरा कुमार को हराने के लिए उतारा गया है.

भाजपा ने दिया नीतीश को समर्थन का संकेत..
गौरतलब है कि कुछ महीनों से नीतीश कुमार के द्वारा उठाये जा रहे कदम बीजेपी की नजदीकी और आरजेडी से दूरी को दिखा रहा है. राष्ट्रपति चुनाव के जरिये ये खुलकर सामने आ गया है. महागठबंधन का भविष्य राष्ट्रपति चुनाव के बाद स्पष्ट हो जायेगा.अगर महागठबंधन टूटता है तो आरजेडी को विपक्ष में बैठना पड़ सकता है. क्योंकि आरजेडी के पास 80 सीट है, वहीं कांग्रेस के पास 27 दोनों मिलकर सरकार नहीं बना सकते.वहीं जेडीयू एक बार फिर से बीजेपी से हाथ मिलाकर सत्ता में काबिज हो सकता है.भाजपा के कई नेताओ ने भी नीतीश कुमार को समर्थन देने सम्बन्धी ब्यान दिए है.

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