​आनेवाले दिनों में नोटबंदी से 22 करोड़ दिहाड़ी मजदूर होंगे बेरोजगार :अर्थशास्त्री गुरुस्वामी

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पटना- जाने-माने अर्थशास्त्री मोहन गुरुस्वामी ने कार्यकर्ताओं के बीच प्रस्तुतिकरण के माध्यम से नोटबंदी से होने वाले नुकसान को समझाया. आने वाले समय में इससे पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में बताते हुए कहा कि इसका प्रभाव देश के विकास दर पर सीधे तौर पर पड़ेगा. देश के जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में 2.5 फीसदी गिरावट आयेगी.

इससे देश में 22 करोड़ रोजाना या दिहाड़ी मजदूरों के काम छिन जायेंगे और दो करोड़ छोटे दुकानदार पूरी तरह से बरबाद हो जायेंगे. उन्होंने कहा कि ब्लैकमनी को लेकर जितना हल्ला मचाया गया था. हकीकत उससे कहीं अलग है. पिछले दिनों ब्लैक मनी में काफी कमी आयी है.

यह कुल जीडीपी का 22 प्रतिशत के आसपास है. यानी इतने रुपये पर लोग टैक्स नहीं देते हैं. स्विट्जरलैंड जैसे छोटे देश में यह रकम वहां की कुल जीडीपी का 8.6 फीसदी है. यह उतनी चिंता की बात नहीं है, जितनी नोटबंदी के बाद पैदा हुई समस्या है.

उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार की 10 सालों के कार्यकाल में देश ने 10 फीसदी ग्रोथ रेट हासिल किया था. परंतु नोटबंदी के बाद यह पूरी तरह से प्रभावित हो जायेगा.

देश में जितनी ब्लैक मनी का रोटेशन होता है, उसमें सबसे ज्यादा जमीन और फ्लैट में 46 फीसदी, चार फीसदी लोग कैश के रूप में रखते हैं तथा सोना में 26 और 24 फीसदी रुपये विदेशों में भेजे जाते हैं.

जितने रुपये बैंकों में जमा हुए हैं, उतने बाजार में आने में सात से आठ महीने का समय लगेगा. उन्होंने कहा कि जहां तक कैशलेस इकोनॉमी की बात है, तो यह भारत जैसे देश के लिए संभव नहीं है

. यहां नगद नारायण से ही सारा कारोबार होता है. यहां कैशलेस की बात करना ब्रेनलेस है. अमेरिका जैसे विकसित देश में आठ फीसदी ट्रांजेक्शन कैश के जरिये ही होता है.

उन्होंने कहा कि बैंकों में अंबानी, अडानी, जिंदल, जीएमआर, जीएमके जैसी कंपनियां बहुत बड़ी कर्जदार हैं. इनके लिए रुपये एनपीए हो गये हैं. अंबानी ने 1.35 करोड़ रुपये कर्ज ले रखा है.

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