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सीएम अखिलेश जी के वज़ह से मैं इंटरनेशनल प्लेयर बन सका :अबू हुवैदा

by Editor

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लखनऊ: गुरूवार को भारत दुनिया ने अबू हुवैदा से मुलाक़ात की. 22 वर्ष के अबू हुवैदा पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी हैं जो देश और विदेश में भारत का परचम लहरा रहे हैं.अपने जज़्बे और अपनी क़ाबिलियत के दम पर हुवैदा ने देश के बड़े बड़े टूर्नामेंट में पदक हासिल किये हैं और पिछले महीने चीन में हुई BWF एशिया पैरा-बैडमिंटन चैंपियनशिप 2016 में वह व्हील चेयर(2) प्रतियोगिता के क्वार्टर फाइनल तक पहुंचे.अबू हुवैदा से हमारे संवाददाता अरग़वान रब्बही से हुई बातचीत के कुछ अंश

(ये इंटरव्यू हैडलाइन 24 के सहयोगी भारतदुनिया के द्वारा लिया गया है और पहले ये bharatduniya  पे प्रसारित  किया है  इंटरव्यू को प्रसारित करने के लिए भारत दुनिया डाट कॉम की लिखित अनुमति आवशयक है )

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आप कब से इस खेल से जुड़े हैं?
मैं 2011 से पैरा-बैडमिंटन खेल रहा हूँ.

क्या आप बचपन से बैडमिंटन ही से जुड़े हैं या कोई और खेल इससे पहले आपको पसंद था?
शुरू में तो मैं क्रिकेट खेलता था लेकिन 2011 के बाद से मैं बैडमिंटन खेल रहा हूँ. वैसे मैं उत्तर प्रदेश की पैरा टीम का कप्तान भी रह चुका हूँ. 2013 तक मैं क्रिकेट टीम का कप्तान रहा लेकिन फिर मैंने बैडमिंटन पर पूरा ध्यान लगा दिया और अब मैं बैडमिंटन ही खेल रहा हूँ.

पैरा-बैडमिंटन में आपके अब तक के सफ़र को बताइये
जी.. मैं कई राष्ट्रीय टूर्नामेंट खेल चुका हूँ और अभी बीजिंग में भी खेल कर आया. चेन्नई में मुझे रयला पैरा-बैडमिंटन में स्वर्ण भी मिला.इसके इलावा बंगलुरु में मुझे डबल्स और सिंगल्स दोनों में सिल्वर मिला. बीजिंग में हुई एशिया पैरा-बैडमिंटन चैंपियनशिप की व्हील चेयर(2) केटेगरी के क्वार्टर फाइनल में पहुँचने वाला मैं पहला भारतीय हूँ. एक बात लेकिन हैं हमारे यहाँ खेलों पर ध्यान नहीं दिया जाता.. चीन में मैं गया तो वहाँ देखा कि वहाँ की सरकार दिव्यांग के खेलों के लिए भी उसी तरह से काम करती है जितना के सामान्य खेलों के लिए करना चाहिए.

आपके मुताबिक़ हमारे यहाँ उतना ध्यान नहीं दिया जा रहा?
जी..चीन में तो मैंने देखा कि सरकार ने सब खिलाड़ियों को बेहतरीन व्हील चेयर दी है जबकि हमें तो ये सब इन्तिज़ाम ख़ुद करना पड़ता है. मुझे तो मेरे अज़ीज़ नफ़ीस सिद्दीक़ी साहब ने व्हील चेयर गिफ्ट की तो मैं खेल पाया…
चीन में तो अभी से ही 2020 में होने वाले टोक्यो के पैरा-ओलंपिक्स की तैयारियाँ चल रही हैं.दिव्यांग लोगों के लिए चीन जैसे देशों में अलग स्टेडियम बने होते हैं जबकि हमें सामान्य खिलाड़ियों के बीच खेलना पड़ता है.मैं मिनी-स्टेडियम में खेलता हूँ और सामान्य खिलाड़ियों को भी हरा देता हूँ… एक दिव्यांग खिलाड़ी सामान्य खिलाड़ी से ज़्यादा मेहनत करता है लेकिन सरकार उनके लिए कुछ नहीं कर रहीं…
वैसे उत्तर प्रदेश की तुलना में दूसरे प्रदेशों में स्थिति बहतर हैं. कर्नाटक,दिल्ली और हरयाणा में सरकारें खेलों को बढ़ावा दे रही हैं..पदक जीतने पर इनामी राशि भी मिलती हैं वहाँ…अफ़सोस होता है कि आप इतनी मेहनत करते हैं लेकिन फिर भी वह तारीफ़ नहीं मिलती जो मिलनी चाहिए

तो उत्तर प्रदेश सरकार कुछ नहीं करती?
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी ने कुछ काम इस बारे में किया है बल्कि अगर मैं आज इंटरनेशनल में खेल पाया हूँ तो वह सिर्फ़ अखिलेश जी की वजह से है. उन्होंने ही मुझे चीन में हुए टूर्नामेंट में जाने के लिए 113500 रूपये दिए और सम्मानित भी किया…लेकिन मैंने सरकार से मांग की है कि वह मुझे अच्छी व्हील चेयर दिलवाएं क्यूंकि साधारण व्हील चेयर भी एक कारण है कि मैं चीन में हुई प्रतियोगिता में आगे नहीं जा पाया.

क्या सरकार ने आपकी मांग को मान लिया है?
मैंने इस बारे में हमने अखिलेश जी को ख़त लिखा है लेकिन अभी तक इस पर कोई जवाब नहीं आया है.

क्या परिवार और आसपास के लोग आपको समर्थन करते हैं?
जी.. अल्लाह का शुक्र से मेरे घर वाले मुझे पूरी तरह से सपोर्ट करते हैं.

आगे आपके क्या प्लान हैं?
मैं 2018 में होने वाले पैरा-एशियाई गेम्स की तैयारी कर रहा हूँ और 2020 के टोक्यो पैरा ओलंपिक्स भी ध्यान में रखे हुए हूँ.

आपके पसंदीदा बैडमिंटन खिलाड़ी कौन हैं?
पी वी सिन्धु. मैं उनसे मिला भी हूँ.. वह बहुत अच्छी इंसान भी हैं.

आप चीन का दौरा करके अभी अभी आये हैं, कैसा लगा वहाँ जाके?
सच बात तो ये है कि शुरू में मैं डरा हुआ था…नई जगह और नए लोग.. लेकिन कुल मिलकर अच्छा लगा. वहाँ प्रदूषण भी कम है और सबसे बड़ी बात ये है कि सरकार खेलों को बहुत बढ़ावा देती है.

चलिए हम दुआ करेंगे कि आगे आप देश के लिए और पदक जीतें और नाम कमायें.
शुक्रिया.

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