शर्मनाक – निशानेबाजों को चन्दा मांगकर मिटानी पड़ रही हैं भूख

शर्मनाक – निशानेबाजों को चन्दा मांगकर मिटानी पड़ रही हैं भूख

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नई दिल्ली- नेशनल स्कूल गेम्स में बागपत के निशानेबाजों को न तो समय पर खाना दिया गया और न ही वापसी में ट्रेन के टिकट। खिलाड़ी 15 घंटे तक भूखे रहे। टीम महज एक कांस्य पदक ही जीत सकी।

हैदराबाद में 26 से 30 नवंबर तक 62वीं एसजीएफआइ नेशनल स्कूल गेम्स रायफल शू¨टग चैंपियनशिप का आयोजन हुआ था। इसमें बागपत के 12 निशानेबाज छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

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टीम मैनेजर नंद किशोर यादव और कोच शोएब खान भी निशानेबाजों के साथ गए थे। तनु चौधरी, प्रवीण और निशा खोखर की टीम ने कांस्य पदक जीता। बागपत के निशानेबाज लौट आए हैं। नीशू खोखर, प्रवीण, निशा खोखर, युविका तोमर, तनु चौधरी, हारुण खान, आशीष डोडवाल, प्रयास डोडवाल, गौरव ने बताया कि टीम मैनेजर ने हैदराबाद में उन्हें 15 घंटे तक खाना नहीं खिलाया। 06_05_2016-shooting1

RPF के हस्तक्षेप के बाद टिकट मिला

कई निशानेबाजों को खाने के लिए इधर-उधर से चंदा मांगना पड़ा। आयोजक सचिव ने उनके खाने का इंतजाम कराया। उन्हें परेशान भी किया गया। इसके चलते वे महज एक कांस्य पदक जीत सके। आरोप लगाया कि पहचान-पत्र के 100-100 रुपये मांगे गए।

वह वापस आने लगे तो उन्हें ट्रेन का टिकट नहीं दिया गया। स्टेशन पर आरपीएफ के हस्तक्षेप के बाद मैनेजर ने उन्हें टिकट दिया। पीडि़त निशानेबाजों का कहना है कि यदि समय से उन्हें खाना मिलता और परेशान न किया जाता तो वे कई पदक ला सकते थे।

आरोप यह भी है कि कुछ निशानेबाजों को मैनेजर ने सभी सुविधाएं समय से उपलब्ध कराईं। टीम मैनेजर नंद किशोर यादव ने कहा, ‘निशानेबाज जो भी आरोप लगा रहे हैं, वह एकदम निराधार हैं।

उन्हें समय पर खाना भी दिया और ट्रेन का टिकट भी दिया गया है। टीम के किसी भी निशानेबाज के साथ पक्षपात नहीं किया गया।’ पीड़ित निशानेबाजों ने भाजपा सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह को आपबीती सुनाते हुए कहा कि उनके साथ पक्षपात न होता तो सोने और चांदी के पदक भी जीत लेते। सांसद ने इस बाबत मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।

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