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उलमा को इंग्लिश ज़बान मैं माहिर बनाना एक क्रांतिकारी उपलब्धि: उपराष्ट्रपति

by Editor

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उपराष्ट्रपति के हाथों मार्कजुल मआरिफ़ की प्रकाशनों का विमोचन

भारत के उपराष्ट्रपति श्री हामिद अंसारी ने अपने आवास पर मार्कजुल मआरिफ़ की तीन इंग्लिश प्रकाशनों का विमोचन अपने हाथों से किया। (1- Prophet Muhammad’s Life: An Introspection on Present Day Conditions 2- Common Mistakes among Muslims 3- The Elevation of Woman in Islam) मार्कजुल मआरिफ़ की शिक्षा और उसकी उपलब्धियों को जान कर उपराष्ट्रपति ने मौलाना बदरुद्दीन अजमल साहब की कोशिशों की भरपुर प्रसंशा की और उनके काम को एक क्रांतिकारी उपलब्धि बताया।

इस प्रतिष्ठित समारोह में मार्कजुल मआरिफ़ के अध्यक्ष और असम से लोक सभा सांसद मौलाना बदरुद्दीन अजमल, मौलाना बुरहानउद्दीन बुरहानुद्दीन कासमी डायरेक्टर मार्कजुल मआरिफ़ एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर, मुफ्ती उबैदुल्लाह कासमी सहायक प्रोफेसर जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज, मुफ्ती मोहम्मदुल्लाह कासमी समन्वयक संचालक इंटरनेट विभाग दारुल दीबन्दा, मौलाना मनज़र बिलाल कासमी पर्सनल सेक्रेटरी मौलाना बदरुद्दीन अजमल के अलावा पुस्तकों के लेखक / अनुवादक मुददस्सीर अहमद क़ासमी, मौलाना तौक़ीर अहमद कासमी और मौलाना हिफजुर रहमान क़ासमी ने भाग लिया।

गौरतलब है कि मार्कजुल मआरिफ़ एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर मौलाना बदरुद्दीन अजमल और अजमल परिवार की ओर से विभिन्न सामाजिक सेवाओं (Ajmal CSR) का एक हिस्सा है जो न केवल यह कि पिछले बाईस वर्षों से मद्रास ग्रेजुएट्स की एक बड़ी संख्या को इंग्लिश भाषा और कंप्यूटर टेक्नोलॉजी की सिच्छा देने मैं लगा हुआ है, बल्कि विभिन्न धार्मिक और सामाजिक विषयों पर अनुवाद और अनुसंधान के माध्यम से अंग्रेजी भाषा में विश्वसनीय साहित्य तैयार करना भी उसके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।

इसलिए अब तक मार्कजुल मआरिफ़ के प्लेटफार्म से १०० से अधिक किताबें प्रसारित हो चुकी हैं। लेकिन अब इस उद्देश्य के लिए मार्कजुल मआरिफ़ एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर ने दिल्ली के बौद्धिक सरजमीं पर औपचारिक रूप से अपना शाखा स्थापित किया है जिसके तहत योजनाबद्ध तरीके से अंग्रेजी भाषा में धार्मिक और सामाजिक साहित्य तैयार किया जा रहा है। ये तीनों किताबें इसी कार्यक्रम का एक हिस्सा हैं।

पहेली किताब “प्रोफेट मुहम्मद’स लाइफ: एन इंट्रोस्पेक्शन ऑन प्रेजेंट डे कंडीशन्स” मार्कजुल मआरिफ़ एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर के शिक्षक प्रसिद्ध लेखक मुददस्सीर अहमद क़ासमी की लिखी हुई है जिसका उर्दू संस्करण (रसूले अकरम की व्यावहारिक जीवन और हम: कितने दूर कितने पास) पहले ही प्रकाशित होकर पाठकों से प्रशंसा प्राप्त कर चुका है।

इस पुस्तक में लेखक ने सामाजिक और पारिवारिक जीवन से संबंधित रसूल पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कार्य से मौजूदा जीवन शैली की तुलना पेश किया है। अपनी तरह की ये अनूठी पुस्तक है जो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के जीवन से वर्तमान सामाजिक और पारिवारिक समस्याओं का सफल समाधान प्रदान करती है।

दूसरी पुस्तक “कॉमन मिस्टेक्स अमंग मुस्लिम्स” दरअसल मौलाना अशरफ अली थानवी की किताब अगलतुल अवाम का अनुवाद है। इस पुस्तक में मुसलमानों के बीच धर्म के नाम पर प्रचलित गलत रस्म व रिवाज की पहचान की गई है। इसे अंग्रेजी भाषा का जामा दारुल उलूम देवबंद के शिक्षक मौलाना तौक़ीर अहमद कासमी ने पहनाया है। अनुवादक ने बड़ी महारत के साथ इस पुस्तक का सफल अंग्रेजी अनुवाद प्रस्तुत किया है।

तीसरी किताब “दा एलिवेशन आफ वुमन इन इस्लाम” मौलाना अब्दुस्समद रहमानी उप अमीर इमारते शरिया, पटना के प्रसिद्ध लेखन (इस्लाम में औरत का मक़ाम) का अंग्रेजी अनुवाद है। अनुवाद का काम रिसर्च स्कालर मौलाना हिफजुर रहमान क़ासमी ने किया है।

इस पुस्तक में लेखक ने धार्मिक, मिल्ली, सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और पारिवारिक मामलों में इस्लाम के माध्यम से दिए गए महिलाओं के सही स्थान तै करने की गंभीर कोशिश की है। उम्मीद है कि आज के दौर में महिलाओं के सही स्थान की समझ में यह पुस्तक सहायक साबित होगी।

इस समारोह में उपराष्ट्रपति के सामने मार्कजुल मआरिफ़ के उद्देश्य के अलावा आगे प्रकाशित होने वाली अन्य पुस्तकों का परिचय भी पेश किया गया। उपाध्यक्ष महोदय ने मार्कजुल मआरिफ़ की चौतरफा गतिविधियों और सेवाओं पर खोशी व्यक्त करते हुए प्रकाशित पुस्तकों की सामग्री, भाषा और पेशकश को भी सराहा और उम्मीद जताई कि प्रकाशित होने वाली किताबें ज्ञान के क्षेत्र में इज़ाफ़े के साथ शोधकर्ताओं केलिये भी सहायक साबित होंगी।

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