कुछ समाजवादी वोटर सिर्फ़ “साइकिल” जानते हैं, जिसे साइकिल निशान मिलेगा उसे होगा फ़ायदा

कुछ समाजवादी वोटर सिर्फ़ “साइकिल” जानते हैं, जिसे साइकिल निशान मिलेगा उसे होगा फ़ायदा

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लखनऊ: समाजवादी पार्टी में अंदरूनी घमासान की लड़ाई अब चुनाव आयोग पहुँच गयी है. अखिलेश और मुलायम दोनों ही ख़ेमों ने साइकिल निशान पर अपना हक़ जताया है. जहां मीडिया से बात करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी का चुनाव चिन्ह उनका दस्तख़त है वहीँ अखिलेश का प्रचार स्लोगन “उम्मीद की साइकिल” है.

1992 में बनी इस पार्टी को बहुत से लोग साइकिल वाली पार्टी के नाम से जानते हैं. ग्रामीण इलाक़ों बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो मुलायम सिंह यादव को बहुत पसंद करते हैं लेकिन उनकी पार्टी का नाम नहीं जानते. हालाँकि ये संख्या बहुत अधिक नहीं है लेकिन पार्टी को लगातार वोट करने वाले लोगों के हिसाब से जांचे तो तक़रीबन 10 प्रतिशत ऐसे समाजवादी वोटर हैं जो सिर्फ़ साइकिल निशान देखते हैं. मामला तब शायद आसान होता जब एक पक्ष इस मुक़ाबले में लड़ाई से पीछे हट जाता लेकिन मुलायम सिंह यादव का कल चुनाव आयोग जाना ये संकेत है कि उन्होंने हार नहीं मानी है.
रामगोपाल यादव भी पूरी कोशिश में लगे हैं कि साइकिल चुनाव चिन्ह उनके हाथ से ना जाने पाए लेकिन जानकारों के मुताबिक़ मुलायम का पक्ष भी बहुत मज़बूत है. ऐसे में किसी एक के पक्ष में फ़ैसला देना चुनाव आयोग के लिए मुश्किल बात होगी और आयोग साइकिल को फ्रीज़ कर सकता है.

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