न सोना, न चांदी पहले शौचालय, बिहार में स्कूली लड़कियों का घर वालों को अनोखा चैलेंज

न सोना, न चांदी पहले शौचालय, बिहार में स्कूली लड़कियों का घर वालों को अनोखा चैलेंज

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बक्सर : बिहार में स्कूल में पढ़ने वाली लड़कियों ने एक ऐसा फैसला किया है, जो सीधे सीधे नीतीश सरकार को जागरूक करने का काम करने जा रहा है। लड़कियों का यह फैसला इतना महत्वपूर्ण है कि यह समाज में तो जागरूकता पैदा करेगा ही साथ ही परिवार के इन ठेकेदारों के लिए भी एक चुनौती साबित होगा, जो महिलाओं के इस महत्वपूर्ण मुद्दे को नजरअंदाज करते रहे हैं।

बिहार के बक्सर जिले की लड़कियों ने नीतीश सरकार को एक निर्णय करने के लिए बाध्य किया है। लड़कियों का यह कदम राज्य की बदलती तस्वीर का संकेत है। download-1

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imagesबिहार में 10 वीं कक्षा की कई छात्राओं ने तब तक सोने का कोई आभूषण नहीं पहनने की शपथ ली है, जब तक खुले में शौच करने की शर्मिंदगी से बचाने के लिए अपने घरों में शौचालय का निर्माण नहीं हो जाता|

बक्सर जिले के एक अधिकारी के अनुसार जिले के एक सरकारी बालिका उच्च विद्यालय की दसवीं कक्षा की 18 में से छह छात्राओं को अभी भी खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है, क्योंकि उनके घरों में शौचालय नहीं हैं। चौंकाने वाली बात है कि स्कूल निरीक्षण के दौरान जब जिले के एक अधिकारी अनुपम सिंह ने लड़कियों से पूछा कि कितने घरों में शौचालय नहीं है, तो 18 लड़कियों ने अपने हाथ उठाए .लड़कियों के अनुसार उनके परिवार न तो गरीब हैं और न ही उन्हें पैसे की कमी है, लेकिन उनकी प्राथमिकताओं में शौचालय का निर्माण कभी रहा ही नहीं|

गौरतलब है कि नई सरकार के गठन के साथ ही बिहार के मुख्यमंत्री ने राज्य के विकास के लिए सात बिंदुओं को दिसंबर महीने में लॉन्च किया था, जो शौचालय को भी शामिल किया गया था। बिहार में लाखों लोग अभी भी बिना शौचालय के घरों में रह रहे हैं। राज्य में क़रीब 1.60 करोड़ परिवारों के अपने घरों में शौचालय नहीं है।

आपको बता दें कि स्वतंत्रता के छह दशक बाद भी भारत में 53 प्रतिशत घर ऐसे हैं जहां शौचालय नहीं हैं। 2011 के आर्थिक और सामाजिक आंकड़े के अनुसार 53 प्रतिशत घरों के अधिकांश सदस्यों को आज भी खुले में शौच जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

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