कैग रिपोर्ट में जवानों को घटिया खाने दिए जाने का हुआ था खुलासा मगर नींद से नही जागी सरकार

कैग रिपोर्ट में जवानों को घटिया खाने दिए जाने का हुआ था खुलासा मगर नींद से नही जागी सरकार

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नई दिल्ली

देश की सबसे बड़ी ऑडिट एजेंसी, कैग देश की सुरक्षा में लगे जवानो को खराब खाना परोसने की जानकारी अपनी रिपोर्ट में दी थी मगर एक  साल बीत जाने पर भी मोदी सरकार नींद से नही जागी .

कैग की रिपोर्ट की माने तो पाकिस्तान और चीन की सीमा पर तैनात भारतीय सेना के जवानों को ताजा खाना नहीं दिया जाता है.

कैग ने पिछले साल दी थी रिपोर्ट
साथ ही ये भी खुलासा हुआ है कि फौजियों को भरपेट भोजन भी नहीं मिलता है। सीमा पर तैनात सैनिकों के खान-पान पर सीएजी ने पिछले साल रिपोर्ट दी थी।

अगस्त 2010, संसद में पेश कैग की रिपोर्ट :
रिपोर्ट में कैग ने सैनिकों के लिए चावल, दाल, शक्कर, चाय, तेल, फल और दूध आदि के ‘सप्लाई चेन प्रबंधन’ पर गंभीर सवाल उठाए.

सेना की उत्तरी कमान में तैनात तीन लाख सैनिकों को राशन की अनुमानित स्टोरेज अवधि के बाद इसकी सप्लाई की गई।
क्वालिटी और स्वाद तीनों मामलों में भोजन सैनिकों के लिये संतोषजनक नहीं.खराब राशन मुहैया कराने वाले प्रतिष्ठानों को काली सूची में डालने से लेकर पूरी प्रक्रिया में परिवर्तन की ज़रूरत.

साल 2011, पीएसी की 15 सिफारिशें…लेकिन सिर्फ दो हुई लागू
संसद की लोकलेखा समिति यानी पीएसी ने राशन की सप्लाई चेन मैनेजममेंट को व्यवस्थित करने के लिए 15 सिफारिशें की थीं, लेकिन सिर्फ दो को लागू किया गया.
सेना की उत्तरी, पश्चिमी और दक्षिणी कमान में राशन की खरीद की प्रक्रिया ग़ैर-प्रतिस्पर्धी है, लिहाज़ा यह राशन न सिर्फ क्वालिटी में खराब है बल्कि इसकी क़ीमत भी ज़्यादा है.
रक्षा मंत्रालय और सेना के बीच समन्वय की कमी के कारण कुछ आइटम अनावश्यक रूप से ज़्यादा मात्रा में खरीद लिये गए.
सेना के कमांड मुख्यालय और डायेरक्टर जनरल ऑफ सप्लाय एंड ट्रांसपोर्ट (डीजीएसटी) के आंकड़ों में काफी अंतर है। जैसे कमांड मुख्यालयों ने 2014-15 में 46 हजार मीट्रिक टन दाल की मांग की थी। डीजीएसटी ने उसे घटाकर 37 हजार मीट्रिक टन कर दिया.

जुलाई 2016, संसद में पेश कैग की रिपोर्ट
जम्मू-कश्मीर के ऑपरेशनल इलाकों में तैनात सैनिकों को एक्सपायरी राशन की सप्लाई।
खाने की क्वालिटी, मात्रा और स्वाद के पैमानों पर 68 फीसदी सैनिकों ने ही इसको संतोषजनक या इससे भी निचले स्तर का माना।

रक्षा मंत्रालय की कार्यशैली पर भी सवाल
कैग ने अपनी रिपोर्ट में रक्षा मंत्रालय की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्मी हेडक्वॉर्टर द्वारा तैयार किए गए राशन-एस्टीमेट को रक्षा मंत्रालय ने 20-23 प्रतिशत तक कम कर दिया। जबकि सेना ने ये राशन फिल्ड-एरिया में तैनात बटालियन और रेजीमेंट्स की वास्तविक खाद खाद्य क्षमता और उपलब्ध स्टॉक के आधार पर तैयार किया था.

 

अब जानिये जवान को कितना राशन मिलता है?
जवान को दिया जाना चाहिए इतना 

आटा/चावल – 620 ग्राम
तेल – 80 ग्राम
चीनी – 90 ग्राम
दाल – 90 ग्राम
चायपत्ती – 9 ग्राम
आलू – 110 ग्राम
सब्जी – 240 ग्राम
मीट अंडा – 285 ग्राम
पनीर -100 ग्राम
दूध- 850ml (शाकाहारी को), 500ml (मांसाहारी को)

लेकिन ये मिलता है 
रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि सेना को ब्रांडेंड आटा तक नहीं मिलता है।
BSF जवान को रोज मिलने वाला राशन :
आटा – 400 ग्राम
चावल – 220 ग्राम
घी/तेल – 60 ग्राम
दाल – 90 ग्राम
मसाले – 14 ग्राम
नमक – 20 ग्राम
चीनी – 60 ग्राम
चायपत्ती – 7 ग्राम
आलू – 60 ग्राम
प्याज – 60 ग्राम
सब्जी – 120 ग्राम
मीट अंडा – 100 ग्राम
पनीर -100 ग्राम
दूध – 850ml (शाकाहारी को), 500ml (मांसाहारी को)

पूर्व ले. जनरल साहनी पर है राशन घोटाला करने का आरोप 
बता दें कि साल 2010 में जवानों को घटिया राशन मुहैया कराने के आरोप में रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल एस के साहनी को हिरासत में लिया गया था.साहनी को वेस्टर्न कमांड हेडक्वार्टर लाया गया है.

साहनी पर आरोप था उन्होंने सियाचिन जैसे दुर्गम इलाकों में तैनात जवानों को घटिया राशन मुहैया कराया. जवानों को बेकार मीट सर्व किया गया.

करोड़ों रुपए के इस घोटाले में 1000 मीट्रिक टन घटिया मसूर दाल की भी खरीद की गई.ये दाल इंसानों के खाने लायक नहीं थी.इस मामले के खुलासे के बाद सेना ने साहनी के कोर्ट मार्शल के लिए एक पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया था.

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