सपा और कांग्रेस का गठबंधन होने पर भाजपा की करारी हार तय

सपा और कांग्रेस का गठबंधन होने पर भाजपा की करारी हार तय

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यूपी में अगले विधानसभा चुनाव का समय जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, सभी पार्टियों की मुश्किलें उतनी ही तेजी से बढ़ती जा रही हैं | पार्टीयां अपनी सहुलियत के अनुसार गठबंधन करने का प्रयास कर रही हैं और जनता को रिझाने के लिए भी नए नए तरीके अाजमां रही हैं |

यूपी मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह यादव का ताजा बयान बसपा के लिए ही नही बीजेपी सहित बाकि विपक्षी पार्टियों के लिए भी चिंता की लकीरे लेकर आया हैं | सीएम अखिलेश यादव का कहना हैं कि हम अकेले ही यूपी में दोबारा सरकार बनाने की स्थिति में हैं, लेकिन अगर गठबंधन कर चुनाव लड़े तो सीटें 300 सौ से ज्यादा जीतेंगे |

सीएम अखिलेश यादव के ताजे बयान ने एक बार फिर यूपी में कांग्रेस और सपा के बीच चुनावी गठबंधन की संभावनाओं को हवा दे दी हैं | पिछले कुछ समय से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का कांग्रेस के प्रति नरम रवैया भी गठबंधन की ओर इशारा कर रहा हैं |
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सपा और कांग्रेस दोनो की हैं अपनी अपनी मजबूरीयां :- करीब तीन दशक से उत्तर प्रदेश की सत्ता से दूर कांग्रेस पार्टी को अब यूपी में लगने लगा हैं कि वो सत्ता से कौसो दूर हैं, इसलिए उसनें यूपी में तीन दशक से खोई हुई अपनी जमीन तो तलाशने में जोर शोर से जुट गई हैं |

काग्रेंस पार्टी नेत्तृत्व को ये भी पता है कि पिछले विधानसभा चुनाव में उसकी कैसी फजीहत हुई थी | 2002 के विधानसभा में कांग्रेस के 334 प्रत्याशियों की की जमानत जब्त हो गई थी, 2007 में 393 उम्मीदवारों में से 323 और वर्ष 2012 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के 355 उम्मीदवारों में 240 अपनी जमानत गंवा बैठे थे |

काग्रेंस नेत्तृत्व अपनी ओर से पूरी कोशिश के बाद भी यूपी में पकड़ नही बना सकी हैं | फिलहाल यूपी का चुनाव मुख्य रुप से बहुजन समाजवादी पार्टी (बीएसपी) और समाजवादी पार्टी (सपा) के मध्य ही घूमता हुआ दिख रहा हैं |
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वही अगर बात करे सपा कि तो वो भी यूपी में सत्ता वापसी और 300 से ज्यादा सीट जीतने को लेकर बेताब दिख रही हैं | खुद सीएम अखिलेश सिंह यादव इसकी सार्वजनिक मंच पर कई बार इच्छा भी जाहिर कर चुके हैं | कांग्रेस नेताओं का मानना है कि मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले और उसके बाद लोगों को हो रही दिक्कतों के चलते चुनाव का समीकरण बदल गया हैं और बीजेपी को इसका नुकसान उठाना पड़ेगा |

काग्रेंस नेताओं का मानना है कि ऐसे में वह सपा और बसपा के लिए कहीं ज्यादा प्रासंगिक हो गई हैं | सपा यदि कांग्रेस को साझेदार बनाती है तो उसे बीजेपी और बीएसपी के खिलाफ यादव-मुस्लिम वोटरों को एकजुट करने में मदद मिलेगी | ऐसे में यूपी में अगर कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ती है तो वह भले ही 100 सीटें ना जीते, लेकिन इससे सपा और बसपा का खेल खराब हो सकता हैं |

फिलहाल नोटबंदी के बाद यूपी में भाजपा बैकफुट पर जाती हुई दिख रही हैं | यूपी में पहले ही भाजपा की सभाओं में भीड़ नही जुटने और मुख्यमंत्री पद को लेकर मचे घमासान के कारण पार्टी में उथल पुथल मची हुई हैं | बसपा लगातार मुस्लिम वोट बैंक को लुभाने की पुरजोर कोशिश करती दिख रही हैं |

ऐसे में कांग्रेस के साथ अगर सपा का चुनावी गठबंधन होता है तो मुस्लिम वोटरों का सपा से बसपा के पाले में शिफ्ट होने की संभावनाएं कमजोर पड़ेंगीं | साथ ही यूपी में कांग्रेस उभरकर आएगी और सपा पहले से अधिक मजबूत होगी | यही नहीं सपा, कांग्रेस के एक साथ मैदान में उतरने से मुस्लिम वोटरों का भरोसा ज्यादा दिलाया जा सकता है कि यह गठबंधन भाजपा को सत्ता में आने से रोक सकता हैं |

इससे भाजपा, बसपा के साथ कई छोटी-छोटी पार्टियों के नुकसान होने की संभावना हैं | मतलब साफ है कि अगर यूपी के अगले विधानसभा चुनाव में यदि ये “मिनी गठबंधन “सपा और कांग्रेस के मध्य होता है तो विपक्षी पार्टी खासकर बसपा और बीजेपी को अगले यूपी विधानसभा चुनाव में करारी हार के लिए तैयार रहना होगा |

इम़रान खान