मोदी जी  वादे कब पुरे होंगे ?

मोदी जी वादे कब पुरे होंगे ?

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“आज नगद कल उधार” ये एक ऐसा मुहावरा है जो अक़्सर दुकानदार अपनी दुकानों पर लगाते है,जिसका सीधा सा मतलब होता है कोई उधार नही, अब ये बात सब पर लागू होती है फिर चाहे मोदी जी ही क्यों न हो, मोदी जी 2014 के चुनाव में प्रचार करने यूपी के लगभग हर ज़िले में गये थे और वहां जाकर प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार होने की जानकारी से लेकर अपने आप को दलित बताने से लेकर यूपी के किसानों के जख्मों पर मलहम लगाने की भी बात कही थी.

जिसमे बिजली देना,क़र्ज़ माफ़ करना जैसी महत्वपूर्ण चीज़ें शामिल थी, अब इस बात को वही रोक कर पुरे तीन साल बाद आ जाइये, यूपी के चुनाव का बोझ लिए बीजेपी के यूपी रथ के कृष्णा बने हुए मोदी जी फ़िर से यूपी में रैलियों की लाइन लगा रहे है,और उसमें भी धड़ाधड़ भाषण दे रहे है और वायदे कर रहे है, लेकिन क्या मोदी जी ने पुराना वायदा पूरा किया?

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लेखक -असद शैख़

किसानों का क़र्ज़ माफ़ किया,उन्हें बिजली दी? अब देखिये मैं संविधान विश्लेषक तो नही हूँ जो आपकों बताऊ या आपसे पुछु की की बताइये वो काम या वादे मोदी जी के अंतर्गत यानि केंद्र सरकार के अंतर्गत आते भी थे.

क्या जिसका वादा मोदी जी भरे पुरे आत्मविश्वास में कर आये थे,ये बात तो सब जानते ही है न फिर भी यूपी का दिल देखिये जी खोल कर वोट दिया मोदी जी को 80 में से एकतरफ़ा 73 सीट दे कर रख दी,और मोदी जी दिल्ली पहुँच गए लेकिन मोदी जी व्यस्त हो गए .

शायद भूल गए या हो सकता है की इतना बड़े यूपी में के किसी किसान का क्या हुआ होगा इस 3 साल में,आत्महत्या करि,किसानी को कर्ज़ लिया क्या किया? और ये सोचे बिना ही मोदी जी फिर पहुँच गये है उत्तर प्रदेश और वो भी पुराना उधार चुकता किये बिना जिसमें 73 सीटों का तोहफ़ा हाथ लगा था?

अरें चलिये छोड़ दीजिए ये बात क्या किसानों की बात करें होती रहेगी बात ये होनी है कि राष्ट्रहित में मोबाइल चलाना कैसे सीखा जाएं तो अब किसानों के लिए भी बड़ी दुविधा हो जायगी की क्या करा जाएं लेकिन ये उन वायदों का सूद ज़रूर हो गया ?

बरहाल मोदी जी नोटबन्दी के नाम पर “कालबाज़रियों” का सफ़ाया करने की बात को लेकर यूपी से एक नया उधार मांग रहे जो फ़िर से वोटों का है.

और बिना पुराने उधार को उतारें कैसे नया उधार मिला सकता है? ये तो पता नही क्या चल रहा है इस “व्यापार” में क्या सौदा होगा,क्या नफा होगा क्या नुकसान होगा लेकिन हां लेकिन मोदी जी तो “व्यापारी” है उन्हें तो पता होगा ही और नही है तो पता होना चाहिए की सियासी व्यापार कैसे चलता है और कैसे नही…

असद शैख़

लेखक के निजी विचार है HEADLINE24 का सहमत होना आवश्यक नही है