जयललिता के बाद किसके हाथ मे होगी पार्टी की कमान ?

जयललिता के बाद किसके हाथ मे होगी पार्टी की कमान ?

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राजनीति के समर्थको में “अम्मा” और “क्रांतिकारी नेता” के नाम से मशहूर तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता का सोमवार रात निधन हो गया | पिछले 75 दिनों से चेन्नई के अपोलो अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते हुए आखिरकार पांच दिसम्बर की रात करीब साढ़े ग्यारह बजे तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता (68) हमेशा हमेशा के लिए इस दुनिया को छोड़कर चल बसी | जयललिता के निधन के बाद समर्थको में शोक की लहर दोड़ पड़ी | जयललिता के निधन के बाद छह दिसंबर से तमिलनाडु में सात दिनों का राजकीय शोक की घोषणा की गयी | वही राज्य के शिक्षण संस्थानों में तीन दिनों की छुट्टी की घोषणा भी कर दी है |

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता के पार्थिव शरीर को मरीना बीच पर उनके राजनीतिक गुरू एमजी रामचंद्रन की समाधि के पास दफनाया गया | जयललिता का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया |उनके अंतिम संस्कार की रस्में उनकी बेहद करीबी मानी जाने वाली शशिकला ने पूरी की | याद रहे शशिकला नटराजन को जयललिता के बाद तमिलनाडु की राजनीति में दूसरी महिला कद्दावर नेता माना जाता है और उम्मीद यही है कि पर्दे के पीछे तमिलनाडु की कमान शशिलका नटराजन ही सम्भालेगी |

मुख्यमंत्री जयललिता का पार्थिव शरीर लोगों के अंतिम विदाई देने के लिए उनके पोएश गार्डन स्थित आवास के बगल में राजाजी हॉल में रखा गया जिसमें देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, काग्रेंस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, काग्रेंस सीनियर लीडर गुलाम नबी आजाद से लेकर फिल्म स्टार रजनीकांत भी जयललिता के अन्तिम विदाई देने के लिए चेन्नई पहुचे | वही देश के प्रमुख राजनेैतिक नेताओ से लेकर फिल्मी हस्तियों तक ने जयललिता की मौत पर शोक प्रकट किया |

“अभिनेत्री के रुप में जयललिता”
राजनीति में आने से पहले जयललिता इग्लिश , हिन्दी, तेलगु, कन्नड़ और तमिल फिल्‍मों में काम किया | बहुत ही कम लोग जानते है कि जयलिलता का राजनेैतिक सफर जितना कामयाब रहा है उतना ही फिल्मी कैरियर भी सफल रहा है |1961 से 1980 के दौरान उनका बेहद सफल फिल्‍मी करियर भी रहा | जयलिलता ने तमिल सिनेमा में 100 से भी ज्‍यादा फिल्‍मों में काम किया वही एक मात्र बॉलीवुड फिल्म “इज्जत” में उन्होने धर्मेन्द्र के साथ काम किया , बॉलीवुड में काम करने के दौरान उनकी उम्र करीब उन्नीस वर्ष बताई जाती है|

“जयललिता का राजनैतिक सफर “

लेखक -इमरान खान

लेखक -इमरान खान

अभिनेत्री से नेता बनीं जयललिता 1980 के दशक की शुरुआत में अन्नाद्रमुक की प्रचार सचिव नियुक्त हुईं | 1984 में सबसे पहले राज्‍यसभा की सदस्‍य बनीं और 1987 में एमजीआर की मृत्‍यु के कुछ समय बाद एमजीआर की विरासत पर दावा किया और 1991 में पहली बार राज्‍य की मुख्‍यमंत्री बनीं |

24 जून 1991 से 12 मई 1996 तक राज्य की पहली निर्वाचित मुख्‍यमंत्री और राज्य की सबसे कम उम्र की मुख्यमंत्री रहीं |

अप्रैल 2011 में जब 11 दलों के गठबंधन ने 14वीं राज्य विधानसभा में बहुमत हासिल किया तो वे तीसरी बार मुख्यमंत्री बनीं | उन्होंने 16 मई 2011 को मुख्‍यमंत्री पद की शपथ लीं और तब से वे राज्य की मुख्यमंत्री थी | जानकी रामचंद्रन के बाद तमिलनाडु की दूसरी महिला मुख्‍यमंत्री बनीं |

याद रहे पिछले तीन दशको से तमिलनाडु की पार्टी की राजनैतिक कमान जयललिता के हाथों में रही और तमिलनाडु राज्य की सियासत का प्रमुख केन्द्र भी बनी रही | जयललिता राज्य की एक लोकप्रिय नेता थीं, जिन्होंने अपने लोकलुभावन कार्यक्रमों से गरीबों का दिल जीता |

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता के निधन के बाद पनीरसेल्वम को मुख्यमंत्री बनाया गया है | पनीरसेल्वम को जयललिता का करीबी माना जाता है साथ ही शशिलका नटराजन के पर्दे के पीछे से कुर्सी सम्भालने की भी बीते सामने आ रही है | जिसमें कही ना कही पार्टी की दुरदर्शता को दिखाता है | शशिलका नटराजन को तमिलनाडु की कद्दावर नेता माना जाता है साथ ही जयललिता के करीबी भी | जयललिता के अंतिम संस्कार की रस्मों में शशिलका का होना दर्शाता है कि तमिलनाडु की राजनैतिक दिशा किस ओर जाने जा रही है |

लेखक -इमरान खान 

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