ओवैसी साहब नोटबंदी पर फसी भाजपा को आप  मुद्दा क्यों दे रहे है ?

ओवैसी साहब नोटबंदी पर फसी भाजपा को आप मुद्दा क्यों दे रहे है ?

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औवेसी के बयान के मायने



आदरणीय असदुद्दीन औवेसी

विमुद्रीकरण से पूरा देश परेशान है यह कहना सही है मगर जब आप कहते हैं कि सिर्फ मुसलमान परेशान हैं तब आप भाजपा को मुद्दा दे रहे होते हैं, पूरा देश जान रहा है कि नोटबंदी का फैसला भाजपा के गले की हड्डी बन गया है। मगर आप हैं कि उसे मुद्दा दे रहे हैं, सिर्फ मुस्लिम विरोधी ही तो भाजपा का खाद्य पानी रहा है, क्या आप इतना भी नही समझते ?

आपने तो कह दिया कि मुस्लिम इलाको के एटीएम में सरकार पैसा नही भेज रही है कभी आपने उन एटीएम को भी देखा जो मुसलमानो के इलाको में तो नहीं हैं मगर उन पर ताला लटका हुआ है। जनता आपको भी समझ रही है और भाजपा को भी।

बंगाल चुनाव के दौरान जब भाजपा बैकफुट पर थी तब भी उसे मुद्दा देने वाले आप ही थे आपने ही कहा कि गर्दन पर छुरी भी रख दे तो भी आप भारत माता की जय नहीं बोलेंगे।

मुस्लिम इलाको के एटीएम है खाली और बैंक में लगे है ताले:ओवैसी

क्या आपने बताया कि वह कौन शख्स था जिसने आपसे आकर कान में कहा था कि भारत माता की जय बोलो वरना गर्दन पर छुरी रख दी जायेगी ? गर कोई ऐसा शख्स था तो उसका नाम सार्वजनिक क्यों नहीं करते ? और अगर नहीं था और यह बयान आपके दिमाग की उपज था तो आपने भाजपा को मुद्दा क्यों दिया ?
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जानते हो आपके छुरी रखना कहते ही ‘राष्ट्रवादी’ आतंकी सड़कों पर उतर आये और राह चलते राहगीर को पकड़कर जबरन भारत माता की जय कहलवाने लगे और न कहने वालो के हाथ पैर तोड़ डाले, यह सब आपकी बदौलत हुआ ‘नकीब ऐ मिल्लत’ साहब।

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मेरी समझ में नहीं आता कि आप उस वक्त ही भाजपा को मुद्दा क्यों देते हैं जब वह बैकफुट पर पड़ी होती है ? अब फिर से आप मुद्दा देने की जुगत में हैं। क्या नोटबंदी से सिर्फ मुसलमान ही परेशान हैं ? आखिर मुसलमान हैं ही कितने महज 14 प्रतिशत। क्या 14 प्रतिशत मुसलमान परेशान हैं और बाकी जनता खुश है ? क्या किसान परेशान नहीं हैं ? क्या सब्जी वाला, रेडी वाला, मजदूर परेशान नहीं हैं ?
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उत्तर प्रदेश का सबसे ज्यादा ताकतवर जिला है कानपुर जानते हो औवेसी मियां वहां पर क्या हुआ है, कानपुर के एक लाख मजदूर एक फैसले से सड़क पर आ गये ये सबके सब मजदूर थे अब उनके घरो में खाने के लाले हैं। क्या खूब कैल्कुलेशन की है आपने ? कि मुसलमान परेशान हैं। अब तक 88 लोग नोटबंदी से मरे हैं मुझे नहीं पता चल पाया कि उनमें से कितने मुसमलान हैं ?

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क्या वे सबसे सब मुसलमान हैं मान लिया जायेगा कि नोटबंदी से सिर्फ मुसमलान परेशान हैं मगर तभी जब मृतको में 20 लोग भी मुसलमान पाये जायें।

आप शायद आज के हिन्दोस्तान से वाकिफ नहीं हैं यहां महंगाई, बेरोजगारी, भुखमरी, लाईनलगी, ये सारी बातें एक तरफ धरी रह जाती हैं और मुसलमानों को पाकिस्तान खदेड़ दो ऐसा नारा देने वालो के साथ हूजूम आ जाता है। कुछ आप जैसे नेता हैं जो ध्रुवीकरण कराने में फासिस्टों की मदद करते हैं।

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बंगाल में भाजपा मुद्दाविहीन थी मगर आपने भारत मां का मुद्दा दे दिया, अब उत्तर प्रदेश नजदीक है भाजपा फिर बैकफुट पर है आप फिर से मुद्दा दे रहे हैं कि मुसलमान परेशान हैं, औवेसी साब मुसलमान कोई अलग से प्रजाती नहीं है उसकी भी वही जरूरते हैं जो बाकी अवाम की हैं, बैंको में अकाउंट उनके भी हैं और दूसरे लोगों के भी हैं परेशानियां उनकी भी बिल्कुल वैसी ही हैं जैसी दूसरे लोगों की हैं।
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इस देश का बहुत बड़ा तबका है दलित और आदिवासियों का तबका जिसकी तादाद 22 प्रतिशत है उनकी समस्याऐं मुसमलानों की समस्याओं से काफी बड़ी हैं। और नोटबंदी ने उन गरीबों की कमर ही तोड़ कर रख दी है। मुसलमान तो सहन कर ही लेंगे क्योंकि उन पर सिर्फ अपनी ही जिम्मेदारी नहीं है बल्कि पड़ोसी की भी जिम्मेदारी है। मगर दूसरे लोग कैसे करेंगे ? आपसे गुजारिश है कि आप मुसलमान मुसलमान चिल्लाकर ध्रुवीकरण कराने का मुद्दा मत दीजिये।

वसीम अकरम त्यागी
लेखक मुस्लिम टुडे मैगजीन के सह संपादक है 

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