एक वो  दौर था जब  आज़म की शिकायत पर छात्र की गिरफ्तारी पर मीडिया ने बवाल काटा था

एक वो दौर था जब आज़म की शिकायत पर छात्र की गिरफ्तारी पर मीडिया ने बवाल काटा था

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लखनऊ

फैसल अफाक

जाकिर अली त्यागी नाम का एक छात्र सोसल मीडिया पर अपनी प्रोफाइल को लेकर गिरफ्तार कर लिया गया है सबसे बड़ी चौकाने वाली बात है कि इस छात्र को दो धारा 66अ और 420 में गिरफ्तार किया गया है.

जहाँ तक 66 A की बात है ये धारा उस समय सुप्रीम कोर्ट ने निष्प्रभावी कर दी थी जब आज़म खान की एक शिकायत पर पुलिस ने 11वी के छात्र को गिरफ्तार करा दिया था.

वही 420 धारा पर क़ानूनी एक्सपर्ट की राय है ये जाकिर अली त्यागी के मामले में लागू नहीं हो सकती है इसका कारण है कि छात्र ने एक शहीद दरोगा की प्रोफाइल पिक लगाई है और ऐसी सूरत में सिर्फ दरोगा के परिजन की शिकायत कर सकते है बरहाल अब मामला कोर्ट में है.

सपा शासन में गिरफ्तारी होने पर मीडिया करता था बवाल
सपा शासन में सोसल मीडिया कमेंट पर हुई गिरफ्तारी को फ्रीडम ऑफ़ स्पीच कह कर आरोपी के प्रति सहानुभूति बटोरने का साधन बनाया गया था चाहे बरेली के छात्र की गिरफ्तारी हो या फिर कहीं और से किसी की ,हर मामले में मीडिया ने जोरशोर से इसे बोलने की आज़ादी से जोड़ कर सपा सरकार को तानाशाह साबित करने की कोशिश की थी.

हलाकि उस समय कई गिरफ्तारी बेहद भड़काऊ कमेन्ट पर हुयी थी और आज़म खान के निर्देश पर गिरफ्तार छात्र ने तो बाकायदा आज़म की प्रोफाइल लगाकर एक धर्म विशेष के खिलाफ बेहद भद्दे कमेन्ट किये थे लेकिन मीडिया ने पुरे मामले में आज़म को खलनायक और आरोपी छात्र को हीरो बना दिया था.

योगी शासन में रिकॉर्ड गिरफ्तारी लेकिन मीडिया चुप

योगी सरकार को सत्ता में आये अभी एक महिना भी नहीं हुआ है लेकिन सोसल मीडिया पर पोस्ट को लेकर कई लड़के गिरफ्तार हो चुके है जिसमे अधिकतर मुस्लिम है जाकिर अली त्यागी के मामले में भी पुलिस ने गिरफ्तारी में बेहद फुर्तीले अंदाज़ में अंजाम दिया.

वही मीडिया लगातार सोसल मीडिया पर हो रही गिरफ्तारी पर चुप और खामोश है अब तो ऐसे मामलो में मीडिया को फ्रीडम ऑफ़ स्पीच कही दिखाई नहीं दे रहा है और ना ही पीड़ित के प्रति सहानुभूति है मीडिया द्वारा अलग अलग सरकारों में सोसल मीडिया से हुई गिरफ्तारियो पर अलग अलग नज़रिया काफी कुछ स्पस्ट कर रहा है.

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