सावधान! नोट बदलवाने के लिए बैंकों का रुख करने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

सावधान! नोट बदलवाने के लिए बैंकों का रुख करने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

Posted by

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भाषा में पुराने नोट कागज के टुकड़े हो चुके हैं। इसलिए अब उन्हें बदलने के लिए लोग परेशान हैं। पहले कहा गया था कि केवल पहचान पत्र लगेगा और पैसा बदल जाएगा, लेकिन अब लोगों को बैंक पहुंचने पर एक फार्म भी भरना पड़ रहा है। इसे लेकर लोगों में गुस्सा है। उधर, बैंक कर्मचारी फेडरेशन ने इस फैसले से पहले बैंकों का इंफ्रास्ट्रक्चर ठीक न करवाने पर सवाल उठाए हैं|
टेक्स चोरी करके घरों में पैसे रखने वाले तो उसकी काट निकालने में लगे हुए हैं लेकिन इससे अधिक परेशानी आम आदमी को झेलनी पड़ रही है। जनता को अपने ही कमाए पैसे के लिए पापड़ बेलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। लोग कामकाज छोड़कर बैंकों के आगे लंबी लंबी कतारों में खड़े हैं। पैसा बदलने के लिए जो फार्म भरवाने जा रहा है वह अंग्रेजी में है। इससे ग्रामीण क्षेत्र के लोग परेशान हैं। एक पेज पर इस रूप में सात तरह की जानकारी देनी पड़ रही है जो पहले शाखा और पैसा बदलवाने वाले का नाम लिखना है। इसके बाद आईडी कार्ड की जानकारी देनी है, साथ ही इस फोटो कॉपी संलग्न करानी होगी|
पहचान पत्र के रूप में आप आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आई कार्ड, पासपोर्ट, नरेगा कार्ड, पैन कार्ड, सरकार द्वारा जारी कार्ड और सार्वजनिक क्षेत्र इकाई द्वारा जारी आई कार्ड में से कोई एक देना होगा। फिर एक स्तंभ में आईडी प्रूफ का नंबर देना होगा। अगले कॉलम में 500 और 1000 के पुराने नोटों विवरण लिखें एस। फिर हस्ताक्षर (आई कार्ड से मेल खाता हुआ) करना है। अंतिम कॉलम में स्थान और तारीख लिखने होगी।

images-2 images-1
जसोला स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में पैसे बदलने आये नाज़ का कहना है कि उन्हें तो पहले फार्म के बारे में बताया ही नहीं गया था। उन्हें तो केवल पहचान पत्र के बारे में पता था। दिल्ली में गोल डाक खाने के बाहर लगी भीड़ में इस फार्म को लेकर विरोध के स्वर उभरे, लेकिन जब व्यवस्था यही है तो उन्हें मजबूरन उसे भरना पड़ा|
बैंक अधिकारियों का कहना है कि काला धन समाप्त करना है तो पैसा परिवर्तन कराने वालों की जानकारी तो लेनी ही होगी। हरियाणा बैंक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष भोला सिंह प्रधान का कहना है कि रिजर्व बैंक के निर्देश है इसलिए कर्मचारियों को इस फार्म को भरवा रहे हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि वैसे सरकार को यह फैसला लागू करने से पहले बैंकों में संसाधनों में वृद्धि किया जाना चाहिए था। बैंकों का इंफ्रास्ट्रक्चर ठीक नहीं है इसलिए कर्मचारियों और जनता दोनों परेशान हैं।